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कक्षा 12 · Antra · अध्याय 8

विद्यापति के पद — विद्यापति

विद्यापति के पदों में प्रेम, विरह और प्रकृति के प्रभाव को सरल व्याख्या के साथ समझें।

13 उत्तरसरल हिंदी

13 worked answers · short steps first, explanations when you need them

प्रश्न-अभ्यास

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 8

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

प्रियतमा के दुख के क्या कारण हैं?

Steps only

नायिका का प्रिय उससे दूर है, इसलिए वह अकेले घर में नहीं रह पाती। सावन की वर्षा और चारों ओर का प्रेममय वातावरण उसके विरह को और बढ़ाते हैं। उसे लगता है कि प्रिय उसका मन अपने साथ ले गया है। वह सखी से कहती है कि उसका गहरा दुख शायद दूसरे लोग समझ न पाएँ।

Answer

नायिका का प्रिय उससे दूर है, इसलिए वह अकेले घर में नहीं रह पाती। सावन की वर्षा और चारों ओर का प्रेममय वातावरण उसके विरह को और बढ़ाते हैं। उसे लगता है कि प्रिय उसका मन अपने साथ ले गया है। वह सखी से कहती है कि उसका गहरा दुख शायद दूसरे लोग समझ न पाएँ।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

“नयन न तिरपित भेल” से विरहिणी की कौन-सी मनोदशा व्यक्त होती है?

Steps only

नायिका कहती है कि प्रिय को जीवन भर देखते रहने पर भी उसकी आँखें तृप्त नहीं हुईं। इससे प्रिय के रूप के प्रति उसका गहरा आकर्षण और बार-बार उन्हें देखने की चाह व्यक्त होती है।

Answer

नायिका कहती है कि प्रिय को जीवन भर देखते रहने पर भी उसकी आँखें तृप्त नहीं हुईं। इससे प्रिय के रूप के प्रति उसका गहरा आकर्षण और बार-बार उन्हें देखने की चाह व्यक्त होती है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

नायिका के प्राण तृप्त न हो पाने का कारण अपने शब्दों में लिखिए।

Steps only

प्रिय का रूप और मधुर वाणी नायिका को बहुत प्रिय हैं। वह उन्हें बार-बार देखती और सुनती रही, फिर भी मन में प्रेम और चाह बनी रहती है। इसलिए उसका हृदय पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता।

Answer

प्रिय का रूप और मधुर वाणी नायिका को बहुत प्रिय हैं। वह उन्हें बार-बार देखती और सुनती रही, फिर भी मन में प्रेम और चाह बनी रहती है। इसलिए उसका हृदय पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

“सेह पिरिति अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए” का आशय क्या है?

Steps only

नायिका कहती है कि प्रिय के प्रेम और अनुराग का जितना वर्णन करो, वह हर क्षण नया लगता है। पुराने अनुभव याद करने पर भी प्रेम की ताजगी और आकर्षण कम नहीं होते।

Answer

नायिका कहती है कि प्रिय के प्रेम और अनुराग का जितना वर्णन करो, वह हर क्षण नया लगता है। पुराने अनुभव याद करने पर भी प्रेम की ताजगी और आकर्षण कम नहीं होते।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

कोयल और भौरों के कलरव का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Steps only

कोयल की आवाज़ और भौरों की गुनगुनाहट नायिका को प्रेम और मिलन की याद दिलाते हैं। विरह में वह इन मधुर ध्वनियों को सह नहीं पाती और कान ढक लेती है।

Answer

कोयल की आवाज़ और भौरों की गुनगुनाहट नायिका को प्रेम और मिलन की याद दिलाते हैं। विरह में वह इन मधुर ध्वनियों को सह नहीं पाती और कान ढक लेती है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

प्रियतम को चारों ओर खोजती नायिका की मनोदशा कवि ने किन शब्दों से व्यक्त की है?

Steps only

कवि “कातर दिठि करि, चौदिस हेरि-हेरि / नयन गरए जल-धारा” शब्दों से नायिका की दशा बताता है। वह दुखी आँखों से चारों ओर प्रिय को खोजती है और रोते-रोते उसकी आँखों से आँसू बहते हैं।

Answer

कवि “कातर दिठि करि, चौदिस हेरि-हेरि / नयन गरए जल-धारा” शब्दों से नायिका की दशा बताता है। वह दुखी आँखों से चारों ओर प्रिय को खोजती है और रोते-रोते उसकी आँखों से आँसू बहते हैं।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

दिए गए मैथिली शब्दों के तत्सम रूप लिखिए: तिरपित, छन, बिदगध, निहारल, पिरित, साओन, अपजस, छिन, तोहारा, कातिक।

Steps only

तिरपित—तृप्त; छन—क्षण; बिदगध—विदग्ध; निहारल—निहारना; पिरित—प्रीति; साओन—श्रावण; अपजस—अपयश; छिन—क्षण; तोहारा—तुम्हारा; कातिक—कार्तिक।

Answer

तिरपित—तृप्त; छन—क्षण; बिदगध—विदग्ध; निहारल—निहारना; पिरित—प्रीति; साओन—श्रावण; अपजस—अपयश; छिन—क्षण; तोहारा—तुम्हारा; कातिक—कार्तिक।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 8(क)

प्रिय के बिना अकेले भवन में रहने और अपने दुख को दूसरों को बताने वाली पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

Steps only

नायिका कहती है कि प्रिय के बिना घर में अकेले रहना असहनीय है। वह चाहती है कि सखी उसके दुख की खबर संसार तक पहुँचाए, क्योंकि उसका वियोग बहुत कठिन है।

Answer

नायिका कहती है कि प्रिय के बिना घर में अकेले रहना असहनीय है। वह चाहती है कि सखी उसके दुख की खबर संसार तक पहुँचाए, क्योंकि उसका वियोग बहुत कठिन है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 8(ख)

प्रिय का रूप देखने और मधुर वाणी सुनने से जुड़ी पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

Steps only

नायिका कहती है कि उसने प्रिय को जीवन भर देखा और उनकी मधुर बातें सुनीं, फिर भी आँखों और कानों की चाह पूरी नहीं हुई। यह उनके प्रति उसके गहरे और कभी न घटने वाले प्रेम को दिखाता है।

Answer

नायिका कहती है कि उसने प्रिय को जीवन भर देखा और उनकी मधुर बातें सुनीं, फिर भी आँखों और कानों की चाह पूरी नहीं हुई। यह उनके प्रति उसके गहरे और कभी न घटने वाले प्रेम को दिखाता है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 8(ग)

खिले वन, कोयल और भौरों वाली पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

Steps only

खिले हुए वन और कोयल-भौरों की मधुर आवाजें प्रेममय वातावरण बनाती हैं। प्रिय से दूर नायिका यह सब देखकर-सुनकर दुखी होती है और आँखें-कान बंद कर लेती है। प्रकृति का सौंदर्य उसके लिए मिलन की याद बनकर विरह को तीखा करता है।

Answer

खिले हुए वन और कोयल-भौरों की मधुर आवाजें प्रेममय वातावरण बनाती हैं। प्रिय से दूर नायिका यह सब देखकर-सुनकर दुखी होती है और आँखें-कान बंद कर लेती है। प्रकृति का सौंदर्य उसके लिए मिलन की याद बनकर विरह को तीखा करता है।

योग्यता-विस्तार

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 8

Question विद्यापति के पद, योग्यता-विस्तार

पाठ के आधार पर विद्यापति की काव्य-भाषा की पाँच विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

Steps only

विद्यापति की काव्य-भाषा की पाँच विशेषताएँ इस प्रकार लिख सकते हैं: 1. भाषा मैथिली है—जैसे “सखि हे” से लोक-बोली का सहज स्वर सुनाई देता है। 2. छोटे, सरल देशज शब्द भाव को साफ़ करते हैं—जैसे “पिअ” (प्रिय)। 3. सखी से बातचीत के रूप में पद रचे गए हैं—“सखि हे” इसका उदाहरण है। 4. सुनने और देखने के बिंब हैं—नायिका रूप देखती और मधुर बोल सुनती है। 5. पद गेय और लयपूर्ण हैं—“गुनि-गुनि” और “सुन-सुन” की पुनरावृत्ति से गाने का प्रवाह बनता है।

Answer

विद्यापति की काव्य-भाषा की पाँच विशेषताएँ इस प्रकार लिख सकते हैं: 1. भाषा मैथिली है—जैसे “सखि हे” से लोक-बोली का सहज स्वर सुनाई देता है। 2. छोटे, सरल देशज शब्द भाव को साफ़ करते हैं—जैसे “पिअ” (प्रिय)। 3. सखी से बातचीत के रूप में पद रचे गए हैं—“सखि हे” इसका उदाहरण है। 4. सुनने और देखने के बिंब हैं—नायिका रूप देखती और मधुर बोल सुनती है। 5. पद गेय और लयपूर्ण हैं—“गुनि-गुनि” और “सुन-सुन” की पुनरावृत्ति से गाने का प्रवाह बनता है।

Question विद्यापति के पद, योग्यता-विस्तार

विद्यापति के गीतों की रिकॉर्डिंग सुनकर उनके गायन-अनुभव पर नोट बनाइए।

Steps only

सुनते समय भाषा की मधुरता, लय, स्वर और भाव पर ध्यान दें। फिर तीन-चार वाक्यों में लिखें कि गायन से पद का विरह या प्रेम-भाव आपको कैसे समझ आया। उपलब्ध रिकॉर्डिंग की वैधता और स्रोत भी जाँचें।

Answer

सुनते समय भाषा की मधुरता, लय, स्वर और भाव पर ध्यान दें। फिर तीन-चार वाक्यों में लिखें कि गायन से पद का विरह या प्रेम-भाव आपको कैसे समझ आया। उपलब्ध रिकॉर्डिंग की वैधता और स्रोत भी जाँचें।

Question विद्यापति के पद, योग्यता-विस्तार

विद्यापति और जायसी के प्रेम-वर्णन की तुलना कीजिए।

Steps only

विद्यापति और जायसी दोनों प्रेम और विरह को केंद्र में रखते हैं। विद्यापति के पदों में राधा-कृष्ण के प्रेम, रूप और मिलन-विरह की निजी अनुभूति गीत की तरह आती है। जायसी के “बारहमासा” में नागमती का विरह बारह महीनों और बदलते मौसमों के सहारे दिखता है। इसलिए विद्यापति का वर्णन अधिक गीतात्मक और निकट भाव वाला है, जबकि जायसी का वर्णन समय और प्रकृति के विस्तार से आगे बढ़ता है।

Answer

विद्यापति और जायसी दोनों प्रेम और विरह को केंद्र में रखते हैं। विद्यापति के पदों में राधा-कृष्ण के प्रेम, रूप और मिलन-विरह की निजी अनुभूति गीत की तरह आती है। जायसी के “बारहमासा” में नागमती का विरह बारह महीनों और बदलते मौसमों के सहारे दिखता है। इसलिए विद्यापति का वर्णन अधिक गीतात्मक और निकट भाव वाला है, जबकि जायसी का वर्णन समय और प्रकृति के विस्तार से आगे बढ़ता है।

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