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कक्षा 12 · Antra · अध्याय 9

कवित्त और सवैया — घनानंद

घनानंद के कवित्त और सवैयों में विरह, प्रतीक्षा और ब्रजभाषा की विशेषता को सरल उत्तरों से समझें।

13 उत्तरसरल हिंदी

13 worked answers · short steps first, explanations when you need them

प्रश्न-अभ्यास

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 9

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास

कवि ने “चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को” क्यों कहा है?

Steps only

कवि लंबे समय से सुजान के आने की प्रतीक्षा कर रहा है। झूठे वादों से उसका विश्वास टूट गया है और अब उसे लगता है कि उसके प्राण निकलने वाले हैं। इसलिए वह चाहता है कि जाते हुए प्राण ही सुजान तक उसका संदेश पहुँचा दें।

Answer

कवि लंबे समय से सुजान के आने की प्रतीक्षा कर रहा है। झूठे वादों से उसका विश्वास टूट गया है और अब उसे लगता है कि उसके प्राण निकलने वाले हैं। इसलिए वह चाहता है कि जाते हुए प्राण ही सुजान तक उसका संदेश पहुँचा दें।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास

कवि मौन रहकर प्रेमिका के कौन-से प्रण को परखना चाहता है?

Steps only

कवि देखना चाहता है कि सुजान मौन रहने की अपनी प्रतिज्ञा कितनी देर निभाती है। वह मानता है कि उसकी पुकार से भरा मौन भी अंततः सुजान को बोलने के लिए प्रेरित करेगा।

Answer

कवि देखना चाहता है कि सुजान मौन रहने की अपनी प्रतिज्ञा कितनी देर निभाती है। वह मानता है कि उसकी पुकार से भरा मौन भी अंततः सुजान को बोलने के लिए प्रेरित करेगा।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास

कवि किस प्रकार की पुकार से “कान खोलिहै” की बात करता है?

Steps only

कवि प्रेम और पीड़ा से भरी अपनी सच्ची पुकार की बात करता है। वह आशा करता है कि सुजान कब तक अनसुना करेगी—कभी तो उसकी पुकार सुनकर ध्यान देगी और उत्तर देगी।

Answer

कवि प्रेम और पीड़ा से भरी अपनी सच्ची पुकार की बात करता है। वह आशा करता है कि सुजान कब तक अनसुना करेगी—कभी तो उसकी पुकार सुनकर ध्यान देगी और उत्तर देगी।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास

घनानंद की रचनाओं की भाषिक विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

Steps only

घनानंद की भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है। उसमें मधुरता और कोमलता है, पर प्रेम-विरह की गहरी पीड़ा भी प्रभावशाली ढंग से व्यक्त होती है। वे मुहावरों, लाक्षणिक अर्थ, चतुर शब्द-प्रयोग और वक्रोक्ति से कम शब्दों में मन की जटिल दशा दिखाते हैं। उनके कवित्त और सवैये गेय और भावपूर्ण हैं।

Answer

घनानंद की भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है। उसमें मधुरता और कोमलता है, पर प्रेम-विरह की गहरी पीड़ा भी प्रभावशाली ढंग से व्यक्त होती है। वे मुहावरों, लाक्षणिक अर्थ, चतुर शब्द-प्रयोग और वक्रोक्ति से कम शब्दों में मन की जटिल दशा दिखाते हैं। उनके कवित्त और सवैये गेय और भावपूर्ण हैं।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 5(क)

पहले कवित्त के “कहि-कहि… गहि-गहि… दै-दै…” वाले अंश में अलंकार पहचानिए।

Steps only

“कहि-कहि”, “गहि-गहि” और “दै-दै” में वही शब्द दोहराए गए हैं। इसलिए यहाँ पुनरुक्ति-प्रकाश अलंकार है। इस दोहराव से प्रिय के आने की कल्पना, उसे सँभालने और सम्मान देने की क्रियाओं में लय आती है।

Answer

“कहि-कहि”, “गहि-गहि” और “दै-दै” में वही शब्द दोहराए गए हैं। इसलिए यहाँ पुनरुक्ति-प्रकाश अलंकार है। इस दोहराव से प्रिय के आने की कल्पना, उसे सँभालने और सम्मान देने की क्रियाओं में लय आती है।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 5(ख)

“कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै” में अलंकार और भाव बताइए।

Steps only

“मूकता” का अर्थ चुप्पी है और “कूक” का अर्थ पुकार। चुप्पी में पुकार का होना विरोधाभास का भाव पैदा करता है। कवि कहना चाहता है कि उसकी चुप्पी भी सुजान को बुलाने वाली पुकार बन गई है।

Answer

“मूकता” का अर्थ चुप्पी है और “कूक” का अर्थ पुकार। चुप्पी में पुकार का होना विरोधाभास का भाव पैदा करता है। कवि कहना चाहता है कि उसकी चुप्पी भी सुजान को बुलाने वाली पुकार बन गई है।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 5(ग)

“अब न घिरत घन आनंद निदान को” में प्रयुक्त अलंकार पहचानिए।

Steps only

“घन आनंद” में “घन” से बादल और कवि के नाम घनानंद—दोनों अर्थ समझे जा सकते हैं। एक शब्द से दो अर्थ निकलने के कारण श्लेष अलंकार है। पंक्ति में “घन” ध्वनि की आवृत्ति से अनुप्रास भी है। कवि कहता है कि अब उसका सुख देने वाला प्रिय सामने नहीं आता।

Answer

“घन आनंद” में “घन” से बादल और कवि के नाम घनानंद—दोनों अर्थ समझे जा सकते हैं। एक शब्द से दो अर्थ निकलने के कारण श्लेष अलंकार है। पंक्ति में “घन” ध्वनि की आवृत्ति से अनुप्रास भी है। कवि कहता है कि अब उसका सुख देने वाला प्रिय सामने नहीं आता।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 6(क)

“बहुत दिनान को अवधि आसपास परे / खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को” का आशय स्पष्ट कीजिए।

Steps only

कवि कहता है कि बहुत समय से प्रतीक्षा करते-करते अब जीवन की अवधि समाप्ति के पास पहुँच गई है। उसके प्राण शरीर छोड़ने को बेचैन हैं। इस कथन से सुजान की प्रतीक्षा और विरह की चरम पीड़ा प्रकट होती है।

Answer

कवि कहता है कि बहुत समय से प्रतीक्षा करते-करते अब जीवन की अवधि समाप्ति के पास पहुँच गई है। उसके प्राण शरीर छोड़ने को बेचैन हैं। इस कथन से सुजान की प्रतीक्षा और विरह की चरम पीड़ा प्रकट होती है।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 6(ख)

मौन रहकर प्रेमिका के प्रण को देखने और “कूकभरी मूकता” से जुड़ी पंक्तियों का आशय बताइए।

Steps only

कवि सुजान के मौन-संकल्प को देख रहा है और सोचता है कि उसकी पुकार से भरी चुप्पी कब तक सहन होगी। उसे विश्वास है कि प्रेमिका अंततः मौन तोड़कर उसकी पुकार का उत्तर देगी।

Answer

कवि सुजान के मौन-संकल्प को देख रहा है और सोचता है कि उसकी पुकार से भरी चुप्पी कब तक सहन होगी। उसे विश्वास है कि प्रेमिका अंततः मौन तोड़कर उसकी पुकार का उत्तर देगी।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 7(क)

झूठे वादों से उदास कवि और जाते प्राणों द्वारा सुजान को संदेश पहुँचाने वाले अंश की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

Steps only

संदर्भ: यह घनानंद के कवित्त का अंश है। कवि सुजान के आने की प्रतीक्षा कर रहा है। उसके बार-बार के आश्वासन सच नहीं हुए, इसलिए कवि उदास है। अब उसे लगता है कि प्राण शरीर छोड़ने वाले हैं और वह चाहता है कि वे सुजान तक उसका अंतिम संदेश पहुँचा दें।

Answer

संदर्भ: यह घनानंद के कवित्त का अंश है। कवि सुजान के आने की प्रतीक्षा कर रहा है। उसके बार-बार के आश्वासन सच नहीं हुए, इसलिए कवि उदास है। अब उसे लगता है कि प्राण शरीर छोड़ने वाले हैं और वह चाहता है कि वे सुजान तक उसका अंतिम संदेश पहुँचा दें।

Question कवित्त और सवैया, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 7(ख)

सुजान के मौन और कवि की पुकार वाले अंश की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

Steps only

संदर्भ: यह घनानंद के दूसरे कवित्त का अंश है। सुजान कवि की ओर ध्यान नहीं दे रही है। कवि पूछता है कि वह कब तक मौन रहेगी और आशा करता है कि उसकी पुकार सुनकर एक दिन उसके कान खुलेंगे, अर्थात वह उसकी बात सुनेगी।

Answer

संदर्भ: यह घनानंद के दूसरे कवित्त का अंश है। सुजान कवि की ओर ध्यान नहीं दे रही है। कवि पूछता है कि वह कब तक मौन रहेगी और आशा करता है कि उसकी पुकार सुनकर एक दिन उसके कान खुलेंगे, अर्थात वह उसकी बात सुनेगी।

योग्यता-विस्तार

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 9

Question कवित्त और सवैया, योग्यता-विस्तार

तुलसीदास, रसखान, पद्माकर और सेनापति के तीन-तीन कवित्त/सवैये खोजने की गतिविधि कैसे पूरी करेंगे?

Steps only

यह संग्रह और कंठस्थ करने की गतिविधि है। प्रत्येक कवि की रचनाएँ विश्वसनीय पुस्तकालय-स्रोत से चुनें, कवि और पुस्तक का नाम लिखें, फिर शिक्षक के निर्देशानुसार याद करके सुनाएँ। पूरी रचनाएँ यहाँ पुनर्मुद्रित करने के बजाय स्रोत-सूची और अपना छोटा परिचय तैयार करें।

Answer

यह संग्रह और कंठस्थ करने की गतिविधि है। प्रत्येक कवि की रचनाएँ विश्वसनीय पुस्तकालय-स्रोत से चुनें, कवि और पुस्तक का नाम लिखें, फिर शिक्षक के निर्देशानुसार याद करके सुनाएँ। पूरी रचनाएँ यहाँ पुनर्मुद्रित करने के बजाय स्रोत-सूची और अपना छोटा परिचय तैयार करें।

Question कवित्त और सवैया, योग्यता-विस्तार

पठित अंश से अनुप्रास अलंकार के उदाहरणों की सूची बनाइए।

Steps only

सूची बनाते समय पास-पास आए समान व्यंजन-ध्वनियों को रेखांकित करें। उदाहरण के लिए “कहि-कहि”, “गहि-गहि” और “दै-दै” में दोहराव तथा समान ध्वनि सुनाई देती है। प्रत्येक उदाहरण के आगे बताएँ कि उससे लय या भाव में क्या प्रभाव आता है।

Answer

सूची बनाते समय पास-पास आए समान व्यंजन-ध्वनियों को रेखांकित करें। उदाहरण के लिए “कहि-कहि”, “गहि-गहि” और “दै-दै” में दोहराव तथा समान ध्वनि सुनाई देती है। प्रत्येक उदाहरण के आगे बताएँ कि उससे लय या भाव में क्या प्रभाव आता है।

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