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कक्षा 12 · Antra · अध्याय 6

भरत-राम का प्रेम; पद — तुलसीदास

भरत के त्याग और राम-प्रेम तथा कौशल्या के विरह को सरल, चरणबद्ध उत्तरों से समझें।

14 उत्तरसरल हिंदी

14 worked answers · short steps first, explanations when you need them

भरत-राम का प्रेम

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 6

Question भरत-राम का प्रेम, प्रश्न-अभ्यास

“हारेंहु खेल जितावहिं मोही” से भरत राम के बारे में क्या बताते हैं?

Steps only

भरत बताते हैं कि राम बचपन से उनसे बहुत प्रेम करते थे। खेल में भी वे कभी-कभी जान-बूझकर हार जाते थे, ताकि भरत जीतकर प्रसन्न हों और उनका मन न टूटे।

Answer

भरत बताते हैं कि राम बचपन से उनसे बहुत प्रेम करते थे। खेल में भी वे कभी-कभी जान-बूझकर हार जाते थे, ताकि भरत जीतकर प्रसन्न हों और उनका मन न टूटे।

Question भरत-राम का प्रेम, प्रश्न-अभ्यास

“मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ” में राम के स्वभाव की कौन-सी विशेषताएँ बताई गई हैं?

Steps only

भरत के अनुसार राम दयालु, धैर्यवान और क्षमा करने वाले हैं। वे अपराध करने वाले पर भी क्रोध नहीं करते। वे भरत से विशेष स्नेह रखते हैं और कभी उनका मन नहीं दुखाते।

Answer

भरत के अनुसार राम दयालु, धैर्यवान और क्षमा करने वाले हैं। वे अपराध करने वाले पर भी क्रोध नहीं करते। वे भरत से विशेष स्नेह रखते हैं और कभी उनका मन नहीं दुखाते।

Question भरत-राम का प्रेम, प्रश्न-अभ्यास

भरत राम के प्रति अपना श्रद्धाभाव किस प्रकार प्रकट करते हैं?

Steps only

भरत राम को अपना स्वामी और पूज्य मानते हैं। उनके सामने भरत भावुक हो जाते हैं और प्रेम के कारण अपनी बात भी संकोच से कहते हैं। वे राम के निर्णय को स्वीकार करते हुए स्वयं को दोषी मानते हैं और उनकी कृपा पर भरोसा रखते हैं।

Answer

भरत राम को अपना स्वामी और पूज्य मानते हैं। उनके सामने भरत भावुक हो जाते हैं और प्रेम के कारण अपनी बात भी संकोच से कहते हैं। वे राम के निर्णय को स्वीकार करते हुए स्वयं को दोषी मानते हैं और उनकी कृपा पर भरोसा रखते हैं।

Question भरत-राम का प्रेम, प्रश्न-अभ्यास

“महीं सकल अनरथ कर मूला” कहकर भरत क्या सोचते और महसूस करते हैं?

Steps only

भरत मानते हैं कि माता कैकेयी के गलत निर्णय से यह अनर्थ हुआ। वे अपने को भी इस दुख का कारण मानकर अपराध-बोध से भर जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनके कारण राम वन गए और अयोध्या के लोग दुखी हुए।

Answer

भरत मानते हैं कि माता कैकेयी के गलत निर्णय से यह अनर्थ हुआ। वे अपने को भी इस दुख का कारण मानकर अपराध-बोध से भर जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनके कारण राम वन गए और अयोध्या के लोग दुखी हुए।

Question भरत-राम का प्रेम, प्रश्न-अभ्यास

“कोदव की बाली में उत्तम धान” और “काली सीपी में मोती” के उदाहरण से कौन-सा भाव और शिल्प प्रकट होता है?

Steps only

भरत कहते हैं कि अनुपयुक्त जगह से उत्तम वस्तु पैदा होना जैसे अस्वाभाविक लगता है, वैसे ही उनके जैसे अभागे व्यक्ति से अच्छा परिणाम कैसे हो सकता है। वे अपने को नीचा और दोषी मान रहे हैं। दो उदाहरण देकर बात समझाने से दृष्टांत अलंकार बनता है।

Answer

भरत कहते हैं कि अनुपयुक्त जगह से उत्तम वस्तु पैदा होना जैसे अस्वाभाविक लगता है, वैसे ही उनके जैसे अभागे व्यक्ति से अच्छा परिणाम कैसे हो सकता है। वे अपने को नीचा और दोषी मान रहे हैं। दो उदाहरण देकर बात समझाने से दृष्टांत अलंकार बनता है।

पद

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 6

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

राम की वस्तुओं को देखकर कौशल्या को कैसा अनुभव होता है?

Steps only

राम के वन जाने के बाद उनकी धनुष और जूतियाँ देखकर कौशल्या को उनकी याद आती है। वे उन वस्तुओं को बार-बार हृदय और आँखों से लगाती हैं, मानो राम पास हों। कभी वे राम को जगाने और भोजन के लिए बुलाने की कल्पना करती हैं; फिर वन-गमन याद आते ही स्तब्ध रह जाती हैं।

Answer

राम के वन जाने के बाद उनकी धनुष और जूतियाँ देखकर कौशल्या को उनकी याद आती है। वे उन वस्तुओं को बार-बार हृदय और आँखों से लगाती हैं, मानो राम पास हों। कभी वे राम को जगाने और भोजन के लिए बुलाने की कल्पना करती हैं; फिर वन-गमन याद आते ही स्तब्ध रह जाती हैं।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

“रहि चकि चित्रलिखी सी” में कौशल्या की कौन-सी दशा दिखाई देती है?

Steps only

राम के वन जाने की बात समझते ही कौशल्या चकित और दुख से जड़ हो जाती हैं। वे ऐसी स्थिर हो जाती हैं मानो किसी चित्र में बनी हों। इस उपमा से उनका गहरा सदमा और विरह साफ दिखाई देता है।

Answer

राम के वन जाने की बात समझते ही कौशल्या चकित और दुख से जड़ हो जाती हैं। वे ऐसी स्थिर हो जाती हैं मानो किसी चित्र में बनी हों। इस उपमा से उनका गहरा सदमा और विरह साफ दिखाई देता है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

“राघौ, एक बार फिरि आवौ” पद में करुणा और संदेश कैसे व्यक्त हुए हैं?

Steps only

माता कौशल्या राम से एक बार लौट आने की विनती करती हैं। वे उन घोड़ों को देखकर दुखी हैं जिन्हें राम ने प्यार से पाला था और जो अब उदास हैं। पद में माँ-बेटे का विरह, राम के प्रति प्रेम और पशुओं के प्रति करुणा व्यक्त होती है। संदेश है कि प्रेम का संबंध मनुष्यों तक सीमित नहीं; देखभाल पाने वाले जीव भी बिछोह महसूस करते हैं।

Answer

माता कौशल्या राम से एक बार लौट आने की विनती करती हैं। वे उन घोड़ों को देखकर दुखी हैं जिन्हें राम ने प्यार से पाला था और जो अब उदास हैं। पद में माँ-बेटे का विरह, राम के प्रति प्रेम और पशुओं के प्रति करुणा व्यक्त होती है। संदेश है कि प्रेम का संबंध मनुष्यों तक सीमित नहीं; देखभाल पाने वाले जीव भी बिछोह महसूस करते हैं।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 4(क)

पठित पदों से उपमा अलंकार के दो उदाहरण दीजिए और उनका अर्थ बताइए।

Steps only

“चित्रलिखी-सी”—चित्र जैसी स्थिर; “सिखी-सी”—सीखी हुई अनुभूति जैसी। “सी” से तुलना है।

Answer

इन दोनों उदाहरणों में उपमा अलंकार है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 4(ख)

पठित पदों में उत्प्रेक्षा अलंकार कहाँ है और उसका प्रयोग क्यों किया गया है?

Steps only

“मनहुँ कमल हिममारे”—घोड़े ऐसे लगते हैं मानो ठंड से कमल मुरझा गए हों।

Answer

“मनहुँ” से उत्प्रेक्षा है; घोड़ों की उदासी अधिक स्पष्ट होती है।

Question पद, प्रश्न-अभ्यास

पठित पदों से कैसे सिद्ध होता है कि तुलसीदास को भाषा पर पूरा अधिकार था?

Steps only

तुलसीदास ने भरत–राम प्रसंग में अवधी और कौशल्या के गीतों में ब्रजभाषा का सहज प्रयोग किया है। संवाद, संबोधन और भाव के अनुसार भाषा बदलती है, फिर भी अर्थ साफ और संगीतात्मक रहता है। चौपाई-दोहा और पद शैली का सुंदर प्रयोग भी उनके काव्य-कौशल को दिखाता है।

Answer

तुलसीदास ने भरत–राम प्रसंग में अवधी और कौशल्या के गीतों में ब्रजभाषा का सहज प्रयोग किया है। संवाद, संबोधन और भाव के अनुसार भाषा बदलती है, फिर भी अर्थ साफ और संगीतात्मक रहता है। चौपाई-दोहा और पद शैली का सुंदर प्रयोग भी उनके काव्य-कौशल को दिखाता है।

योग्यता-विस्तार

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 6

Question योग्यता-विस्तार

महानता लाभ के लोभ से मुक्ति और समर्पण-त्याग से मिलती है—इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Steps only

भरत राजसिंहासन और व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं रखते। वे राम के अधिकार और परिवार के हित को अपने सुख से ऊपर रखते हैं। उनका त्याग और समर्पण दिखाता है कि सच्ची महानता पद या धन से नहीं, निस्वार्थ प्रेम और सही मूल्य चुनने से मिलती है।

Answer

भरत राजसिंहासन और व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं रखते। वे राम के अधिकार और परिवार के हित को अपने सुख से ऊपर रखते हैं। उनका त्याग और समर्पण दिखाता है कि सच्ची महानता पद या धन से नहीं, निस्वार्थ प्रेम और सही मूल्य चुनने से मिलती है।

Question योग्यता-विस्तार

भरत के त्याग और समर्पण के अन्य प्रसंगों की जानकारी किस तरह प्रस्तुत करेंगे?

Steps only

नमूना उत्तर: भरत राम के वनवास के बाद राजसिंहासन स्वीकार नहीं करते। वे राम की खड़ाऊँ को राजगद्दी पर रखकर स्वयं प्रतिनिधि के रूप में राज्य चलाते हैं और राम की वापसी की प्रतीक्षा करते हैं। अपने उत्तर में रामायण के विश्वसनीय पाठ से प्रसंग की पुष्टि करें।

Answer

नमूना उत्तर: भरत राम के वनवास के बाद राजसिंहासन स्वीकार नहीं करते। वे राम की खड़ाऊँ को राजगद्दी पर रखकर स्वयं प्रतिनिधि के रूप में राज्य चलाते हैं और राम की वापसी की प्रतीक्षा करते हैं। अपने उत्तर में रामायण के विश्वसनीय पाठ से प्रसंग की पुष्टि करें।

Question योग्यता-विस्तार

आज के समय में राम और भरत जैसा भ्रातृप्रेम संभव है? अपनी राय तर्क सहित लिखिए।

Steps only

हाँ, ऐसा प्रेम आज भी संभव है। इसका अर्थ हर बात में एक जैसा होना नहीं, बल्कि भाई-बहनों के अधिकार का सम्मान करना, कठिन समय में साथ देना और स्वार्थ से ऊपर उठकर न्यायपूर्ण व्यवहार करना है। परिवार में खुली बातचीत और भरोसा इस प्रेम को मजबूत करते हैं।

Answer

हाँ, ऐसा प्रेम आज भी संभव है। इसका अर्थ हर बात में एक जैसा होना नहीं, बल्कि भाई-बहनों के अधिकार का सम्मान करना, कठिन समय में साथ देना और स्वार्थ से ऊपर उठकर न्यायपूर्ण व्यवहार करना है। परिवार में खुली बातचीत और भरोसा इस प्रेम को मजबूत करते हैं।

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