LEARNING CLOSE TO YOU

Choose your location

Use a city to find schools, tutors, educators and learning support. You can change it anytime.

With your permission, your browser shares your coordinates with Google to find your city.

कक्षा 12 · Antra · अध्याय 13

गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात — भीष्म साहनी

भीष्म साहनी के संस्मरण में गांधी, नेहरू और अराफ़ात के व्यवहार, करुणा और अतिथि-सत्कार को सरल उत्तरों से समझें।

15 उत्तरसरल हिंदी

15 worked answers · short steps first, explanations when you need them

प्रश्न-अभ्यास

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 13

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 1

लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?

Steps only

लेखक लगभग 1938 के समय कुछ दिन अपने भाई बलराज के पास रहने सेवाग्राम गया था। बलराज वहाँ ‘नई तालीम’ पत्रिका के सह-संपादक के रूप में काम कर रहे थे। लेखक उनसे मिलने और उनके साथ कुछ समय बिताने गया था।

Answer

लेखक लगभग 1938 के समय कुछ दिन अपने भाई बलराज के पास रहने सेवाग्राम गया था। बलराज वहाँ ‘नई तालीम’ पत्रिका के सह-संपादक के रूप में काम कर रहे थे। लेखक उनसे मिलने और उनके साथ कुछ समय बिताने गया था।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 2

लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा?

Steps only

लेखक गांधीजी को तस्वीरों में देख चुका था, इसलिए उन्हें सामने देखकर उत्साहित और संकोच से भरा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि उनसे क्या कहे। भाई के परिचय कराने पर गांधीजी ने सहजता से उससे बात की और रावलपिंडी की पुरानी यात्रा याद की। इस छोटे संवाद ने लेखक की झिझक कम कर दी।

Answer

लेखक गांधीजी को तस्वीरों में देख चुका था, इसलिए उन्हें सामने देखकर उत्साहित और संकोच से भरा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि उनसे क्या कहे। भाई के परिचय कराने पर गांधीजी ने सहजता से उससे बात की और रावलपिंडी की पुरानी यात्रा याद की। इस छोटे संवाद ने लेखक की झिझक कम कर दी।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 3

लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन लोगों के आने का ज़िक्र किया है?

Steps only

लेखक ने गांधीजी के साथ रहने वाले कस्तूरबा, डॉक्टर सुशीला नैयर और महादेव देसाई का उल्लेख किया है। सेवाग्राम में पृथ्वीसिंह आज़ाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान और कुछ दिनों के लिए राजेंद्र बाबू भी आए थे।

Answer

लेखक ने गांधीजी के साथ रहने वाले कस्तूरबा, डॉक्टर सुशीला नैयर और महादेव देसाई का उल्लेख किया है। सेवाग्राम में पृथ्वीसिंह आज़ाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान और कुछ दिनों के लिए राजेंद्र बाबू भी आए थे।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 4

रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार का था?

Steps only

गांधीजी बालक की पुकार सुनकर तुरंत उसके पास पहुँचे। ईख का रस अधिक पीने से उसका पेट फूल गया था। गांधीजी ने उसके पेट पर हाथ फेरा, उसे सहारा देकर उल्टी करने में मदद की और पीठ पर हाथ रखकर पास खड़े रहे। बालक को आराम मिलने पर उन्होंने उसे लेटने को कहा। वे उसकी घबराहट पर नाराज़ नहीं हुए; हँसते हुए समझाया। इससे उनकी करुणा, सेवा-भाव और सहजता दिखाई देती है।

Answer

गांधीजी ने बालक की पुकार सुनकर तुरंत उसके पास जाकर हाल पूछा। उन्होंने उसके पेट की तकलीफ़ समझी, उसे संभाला और आराम करने को कहा। बालक की घबराहट पर वे नाराज़ नहीं हुए; उन्होंने हल्के हास्य से उसे सहज किया और उसके ठीक होने तक पास रहे। उनका व्यवहार दयालु, व्यावहारिक और धैर्यपूर्ण था।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 5

कश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया?

Steps only

कश्मीर यात्रा में शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेहरूजी की नावों से शोभायात्रा निकाली गई। झेलम नदी के दोनों किनारों पर हजारों कश्मीरी उत्साह से उनका स्वागत कर रहे थे। लेखक ने इस दृश्य को भव्य और यादगार बताया है।

Answer

कश्मीर यात्रा में शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेहरूजी की नावों से शोभायात्रा निकाली गई। झेलम नदी के दोनों किनारों पर हजारों कश्मीरी उत्साह से उनका स्वागत कर रहे थे। लेखक ने इस दृश्य को भव्य और यादगार बताया है।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 6

अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता स्पष्ट होती है?

Steps only

लेखक ने नेहरूजी का ध्यान पाने के लिए अखबार पढ़ने का बहाना किया। नेहरूजी ने विनम्रता से पूछा कि क्या उन्होंने अखबार देख लिया है, फिर उसे पढ़ने के लिए माँगा। इस प्रसंग से उनका सहज, विनम्र और दूसरों की उपस्थिति के प्रति सजग व्यवहार दिखता है। वे अपने पद का दबाव नहीं बनाते।

Answer

लेखक ने नेहरूजी का ध्यान पाने के लिए अखबार पढ़ने का बहाना किया। नेहरूजी ने विनम्रता से पूछा कि क्या उन्होंने अखबार देख लिया है, फिर उसे पढ़ने के लिए माँगा। इस प्रसंग से उनका सहज, विनम्र और दूसरों की उपस्थिति के प्रति सजग व्यवहार दिखता है। वे अपने पद का दबाव नहीं बनाते।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 7

फिलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया सहानुभूतिपूर्ण और समर्थन-भरा क्यों था?

Steps only

लेख में भारत के नेताओं और लोगों की सहानुभूति का संबंध स्वतंत्रता तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के अनुभव से दिखाया गया है। भारत ने फिलिस्तीनी लोगों की कठिनाइयों को समझते हुए उनके अधिकारों और स्वतंत्रता के समर्थन का भाव रखा। यह मानवीय एकजुटता और उपनिवेशवाद-विरोधी सोच से जुड़ा था।

Answer

लेख में भारत के नेताओं और लोगों की सहानुभूति का संबंध स्वतंत्रता तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के अनुभव से दिखाया गया है। भारत ने फिलिस्तीनी लोगों की कठिनाइयों को समझते हुए उनके अधिकारों और स्वतंत्रता के समर्थन का भाव रखा। यह मानवीय एकजुटता और उपनिवेशवाद-विरोधी सोच से जुड़ा था।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 8

अराफ़ात के आतिथ्य-प्रेम से संबंधित कोई दो घटनाएँ लिखिए।

Steps only

पहली घटना में अराफ़ात लेखक और उनकी पत्नी का बाहर आकर स्वागत करते हैं और उन्हें भीतर ले जाते हैं। भोजन से पहले वे अपने हाथों से फल छीलकर खिलाते हैं और उनके लिए शहद की चाय बनाते हैं। दूसरी घटना में लेखक जब गुसलखाने से बाहर आते हैं, तो अराफ़ात तौलिया लिए उनकी प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। इन छोटे कामों से उनका आत्मीय और ध्यान रखने वाला आतिथ्य दिखाई देता है।

Answer

पहली घटना में अराफ़ात लेखक और उनकी पत्नी को बिना लंबी औपचारिकता के अपने साथ भीतर ले जाते हैं और सहज बातचीत करते हैं। दूसरी घटना में वे अतिथियों के साथ बैठकर फल छीलते हैं और अपने हाथ से शहद वाली चाय बनाते हैं। इन प्रसंगों से उनका अपनापन और मेहमानों की व्यक्तिगत देखभाल दिखाई देती है।

Question प्रश्न-अभ्यास, प्रश्न 9

अराफ़ात ने क्यों कहा कि गांधी और नेहरू केवल भारत के ही नहीं, हमारे भी नेता हैं? इस कथन के आधार पर गांधी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।

Steps only

अराफ़ात ने यह बात इसलिए कही कि भारत के नेता फ़िलिस्तीन के साथ हो रहे अन्याय की आलोचना करते थे और वहाँ के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करते थे। गांधीजी सत्य और अहिंसा के लिए खड़े हुए और साधारण लोगों की पीड़ा को महत्व दिया। सेवाग्राम में उन्होंने बीमार बालक की मदद की और नियमित रूप से एक रोगी का हाल पूछते थे। उनका सादा जीवन, करुणा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष भारत से बाहर के लोगों को भी प्रेरित करता था; इसलिए अराफ़ात उन्हें अपना नेता मानते थे।

Answer

अराफ़ात गांधी और नेहरू को साझा स्वतंत्रता, न्याय और मानवीय गरिमा के प्रतीक मानते थे। उनका कहना था कि इन नेताओं के विचार केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि अन्याय से जूझ रहे लोगों के भी प्रेरणास्रोत हैं। गांधीजी का व्यक्तित्व करुणा, अहिंसा, सादगी और हर व्यक्ति की चिंता से बना था; वे अपने व्यवहार से इन मूल्यों को जीते थे।

भाषा-शिल्प

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 13

Question भाषा-शिल्प, प्रश्न 1

पाठ से क्रियाविशेषण चुनिए और उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

Steps only

उदाहरण: “प्रातः” (समय)—मैं प्रातः पढ़ाई करता हूँ। “धीरे” (रीति)—कछुआ धीरे चलता है। “अक्सर” (बारंबारता)—हम अक्सर पुस्तकालय जाते हैं। “सहसा” (अचानक)—सहसा बारिश शुरू हो गई। ये शब्द बताते हैं कि काम कब, कैसे या कितनी बार हुआ।

Answer

उदाहरण: “प्रातः” (समय)—मैं प्रातः पढ़ाई करता हूँ। “धीरे” (रीति)—कछुआ धीरे चलता है। “अक्सर” (बारंबारता)—हम अक्सर पुस्तकालय जाते हैं। “सहसा” (अचानक)—सहसा बारिश शुरू हो गई। ये शब्द बताते हैं कि काम कब, कैसे या कितनी बार हुआ।

Question भाषा-शिल्प, प्रश्न 2

“मैं सेवाग्राम में ... माँ जैसी लगती” गद्यांश में क्रिया पर ध्यान दीजिए।

Steps only

इस अंश में “लगती थीं” क्रिया है। यह कस्तूरबा के बैठने और लेखक को माँ जैसी दिखाई देने की बात बताती है। स्त्रीलिंग कर्ता के अनुसार “लगती” रूप आया है और बीते समय को “थीं” से व्यक्त किया गया है।

Answer

इस अंश में “लगती थीं” क्रिया है। यह कस्तूरबा के बैठने और लेखक को माँ जैसी दिखाई देने की बात बताती है। स्त्रीलिंग कर्ता के अनुसार “लगती” रूप आया है और बीते समय को “थीं” से व्यक्त किया गया है।

Question भाषा-शिल्प, प्रश्न 3

नेहरू जी द्वारा सुनाई गई कहानी अपने शब्दों में लिखिए।

Steps only

नेहरूजी ने एक गरीब बाजीगर की कहानी सुनाई। क्रिसमस पर लोग चर्च में माता मरियम को फूल और उपहार चढ़ाने जा रहे थे, पर गरीब बाजीगर के पास देने के लिए कुछ नहीं था। उसने सोचा कि वह अपने करतबों से श्रद्धा व्यक्त कर सकता है। सबके जाने के बाद उसने चर्च में करतब दिखाए। एक पादरी उसे रोकने आया, पर तभी माता मरियम की प्रतिमा उसके पास आई और अपने आँचल से उसका पसीना पोंछा। कहानी बताती है कि सच्ची भक्ति धन से नहीं, मन की निष्ठा से होती है।

Answer

नेहरूजी ने एक गरीब बाजीगर की कहानी सुनाई। क्रिसमस पर लोग चर्च में माता मरियम को फूल और उपहार चढ़ाने जा रहे थे, पर गरीब बाजीगर के पास देने के लिए कुछ नहीं था। उसने सोचा कि वह अपने करतबों से श्रद्धा व्यक्त कर सकता है। सबके जाने के बाद उसने चर्च में करतब दिखाए। एक पादरी उसे रोकने आया, पर तभी माता मरियम की प्रतिमा उसके पास आई और अपने आँचल से उसका पसीना पोंछा। कहानी बताती है कि सच्ची भक्ति धन से नहीं, मन की निष्ठा से होती है।

योग्यता-विस्तार

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 13

Question योग्यता-विस्तार, प्रश्न 1

भीष्म साहनी की अन्य रचनाएँ ‘तमस’ और ‘मेरा भाई बलराज’ पढ़िए।

Steps only

यह पठन-कार्य है। पढ़ते समय दोनों रचनाओं के विषय, प्रमुख पात्र और लेखक के दृष्टिकोण के छोटे नोट बनाइए। फिर कक्षा में चर्चा करें कि लेखक अपने अनुभवों और सामाजिक परिवेश को कैसे प्रस्तुत करते हैं। पुस्तक से लंबे अंश उतारने के बजाय अपनी भाषा में विचार लिखें।

Answer

यह पठन-कार्य है। पढ़ते समय दोनों रचनाओं के विषय, प्रमुख पात्र और लेखक के दृष्टिकोण के छोटे नोट बनाइए। फिर कक्षा में चर्चा करें कि लेखक अपने अनुभवों और सामाजिक परिवेश को कैसे प्रस्तुत करते हैं। पुस्तक से लंबे अंश उतारने के बजाय अपनी भाषा में विचार लिखें।

Question योग्यता-विस्तार, प्रश्न 2

गांधी तथा नेहरू जी से संबंधित अन्य संस्मरण पढ़कर उन पर टिप्पणी लिखिए।

Steps only

टिप्पणी में संस्मरण का स्रोत बताएँ, लेखक ने नेता को किस परिस्थिति में देखा यह लिखें, और उस घटना से कौन-सा गुण सामने आता है यह समझाएँ। अंत में तुलना करें कि इस पाठ की घटनाओं से वह संस्मरण किस प्रकार मिलता-जुलता या अलग है।

Answer

टिप्पणी में संस्मरण का स्रोत बताएँ, लेखक ने नेता को किस परिस्थिति में देखा यह लिखें, और उस घटना से कौन-सा गुण सामने आता है यह समझाएँ। अंत में तुलना करें कि इस पाठ की घटनाओं से वह संस्मरण किस प्रकार मिलता-जुलता या अलग है।

Question योग्यता-विस्तार, प्रश्न 3

यास्सेर अराफ़ात के आतिथ्य से क्या प्रेरणा मिलती है और आप अपने अतिथि का सत्कार कैसे करेंगे?

Steps only

अराफ़ात का उदाहरण सिखाता है कि अतिथि-सत्कार महँगे इंतज़ाम से अधिक सम्मान, समय और आत्मीयता से बनता है। मैं अतिथि का स्वागत करूँगा, उनकी सुविधा पूछूँगा, भोजन या पानी दूँगा और बातचीत में उन्हें शामिल करूँगा। उनकी पसंद और जरूरत का ध्यान रखूँगा, पर उन पर कोई बात थोपूँगा नहीं।

Answer

अराफ़ात का उदाहरण सिखाता है कि अतिथि-सत्कार महँगे इंतज़ाम से अधिक सम्मान, समय और आत्मीयता से बनता है। मैं अतिथि का स्वागत करूँगा, उनकी सुविधा पूछूँगा, भोजन या पानी दूँगा और बातचीत में उन्हें शामिल करूँगा। उनकी पसंद और जरूरत का ध्यान रखूँगा, पर उन पर कोई बात थोपूँगा नहीं।

WE’RE HERE TO HELP

How can we help?

Looking for a special educator, a tutor, or learning support? Send us your query.