10 worked answers · short steps first, explanations when you need them
पाठ के साथ
Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 15
Question पाठ के साथ, q1
आंबेडकर जाति-प्रथा को केवल श्रम-विभाजन क्यों नहीं मानते?
Steps only
श्रम-विभाजन में समाज के अलग काम बाँटे जाते हैं; जाति-प्रथा काम करने वाले लोगों को भी जन्म के आधार पर ऊँच-नीच के वर्गों में बाँटती है। इसमें पेशा व्यक्ति की रुचि, क्षमता या प्रशिक्षण से नहीं, परिवार की जाति से तय होता है। काम चुनने और बदलने की स्वतंत्रता न होने से यह व्यवस्था अन्यायपूर्ण है।
Answer
श्रम-विभाजन में समाज के अलग काम बाँटे जाते हैं; जाति-प्रथा काम करने वाले लोगों को भी जन्म के आधार पर ऊँच-नीच के वर्गों में बाँटती है। इसमें पेशा व्यक्ति की रुचि, क्षमता या प्रशिक्षण से नहीं, परिवार की जाति से तय होता है। काम चुनने और बदलने की स्वतंत्रता न होने से यह व्यवस्था अन्यायपूर्ण है।
Question पाठ के साथ, q2
जाति-प्रथा बेरोजगारी और भूख का कारण कैसे बनती रही है? क्या आज भी इसका असर है?
Steps only
जब किसी व्यक्ति का पेशा जन्म से तय कर दिया जाए और उसे बदलने की छूट न हो, तो उसकी रुचि या योग्यता का उपयोग नहीं हो पाता। उद्योग और तकनीक बदलने पर पुराना काम समाप्त भी हो सकता है; तब पेशा बदलने की मनाही व्यक्ति को बेरोजगारी या गरीबी में धकेल सकती है। आज कानूनी और सामाजिक बदलावों के बावजूद जाति-आधारित भेदभाव और अवसरों की असमानता अब भी असर डाल सकती है।
Answer
जब किसी व्यक्ति का पेशा जन्म से तय कर दिया जाए और उसे बदलने की छूट न हो, तो उसकी रुचि या योग्यता का उपयोग नहीं हो पाता। उद्योग और तकनीक बदलने पर पुराना काम समाप्त भी हो सकता है; तब पेशा बदलने की मनाही व्यक्ति को बेरोजगारी या गरीबी में धकेल सकती है। आज कानूनी और सामाजिक बदलावों के बावजूद जाति-आधारित भेदभाव और अवसरों की असमानता अब भी असर डाल सकती है।
Question पाठ के साथ, q3
आंबेडकर के अनुसार दासता का व्यापक अर्थ क्या है?
Steps only
दासता केवल कानून से किसी को बंदी बनाने का नाम नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा और क्षमता के विरुद्ध दूसरों द्वारा तय काम और व्यवहार करने को मजबूर किया जाए, तो वह भी दासता जैसी स्थिति है। जाति-आधारित पेशा-बंधन इसका उदाहरण बन सकता है।
Answer
दासता केवल कानून से किसी को बंदी बनाने का नाम नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा और क्षमता के विरुद्ध दूसरों द्वारा तय काम और व्यवहार करने को मजबूर किया जाए, तो वह भी दासता जैसी स्थिति है। जाति-आधारित पेशा-बंधन इसका उदाहरण बन सकता है।
Question पाठ के साथ, q4
क्षमता और पारिवारिक पृष्ठभूमि में अंतर रहते हुए भी आंबेडकर समानता को व्यवहारिक सिद्धांत क्यों मानते हैं?
Steps only
लोगों की शारीरिक क्षमता, शिक्षा और पारिवारिक संसाधन अलग हो सकते हैं। लेकिन इन अंतरों के कारण किसी को जन्म से कम अधिकार या अवसर देना उचित नहीं है। लोकतंत्र में सभी को समान सम्मान और आरंभिक अवसर मिलना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति अपनी क्षमता विकसित कर सके। समाज के लिए सबके साथ समान व्यवहार करना व्यावहारिक और न्यायपूर्ण आधार है।
Answer
लोगों की शारीरिक क्षमता, शिक्षा और पारिवारिक संसाधन अलग हो सकते हैं। लेकिन इन अंतरों के कारण किसी को जन्म से कम अधिकार या अवसर देना उचित नहीं है। लोकतंत्र में सभी को समान सम्मान और आरंभिक अवसर मिलना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति अपनी क्षमता विकसित कर सके। समाज के लिए सबके साथ समान व्यवहार करना व्यावहारिक और न्यायपूर्ण आधार है।
Question पाठ के साथ, q5
क्या जातिवाद समाप्त करने के लिए समान मानवीय सम्मान के साथ जीवन की सुविधाओं और अवसरों पर विचार भी जरूरी है? कारण सहित उत्तर दें।
Steps only
हाँ। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि सब मनुष्य बराबर हैं, यदि शिक्षा, सुरक्षित जीवन, आजीविका और संसाधनों तक पहुँच कुछ समूहों के लिए बंद हो। समान मानवीय सम्मान का अर्थ भेदभाव मिटाना और अवसरों की बाधाएँ दूर करना भी है। इससे व्यक्ति अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार जीवन बना सकता है।
Answer
हाँ। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि सब मनुष्य बराबर हैं, यदि शिक्षा, सुरक्षित जीवन, आजीविका और संसाधनों तक पहुँच कुछ समूहों के लिए बंद हो। समान मानवीय सम्मान का अर्थ भेदभाव मिटाना और अवसरों की बाधाएँ दूर करना भी है। इससे व्यक्ति अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार जीवन बना सकता है।
Question पाठ के साथ, q6
आंबेडकर के आदर्श समाज में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का क्या स्थान है? “बंधुत्व” शब्द से आप कितनी सहमति रखते हैं?
Steps only
आदर्श समाज में स्वतंत्रता व्यक्ति को सोचने, आने-जाने और पेशा चुनने का अधिकार देती है। समानता सबको सम्मान और अवसर देती है। बंधुत्व का अर्थ लोगों के बीच अपनापन, सहयोग और एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान है। यह भावना स्त्रियों सहित सभी लोगों को शामिल करे; इसलिए “बंधुत्व” के साथ “सहभाव” या “भाईचारा और बराबरी” कहना भी अधिक समावेशी हो सकता है।
Answer
आदर्श समाज में स्वतंत्रता व्यक्ति को सोचने, आने-जाने और पेशा चुनने का अधिकार देती है। समानता सबको सम्मान और अवसर देती है। बंधुत्व का अर्थ लोगों के बीच अपनापन, सहयोग और एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान है। यह भावना स्त्रियों सहित सभी लोगों को शामिल करे; इसलिए “बंधुत्व” के साथ “सहभाव” या “भाईचारा और बराबरी” कहना भी अधिक समावेशी हो सकता है।
पाठ के आसपास
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Question पाठ के आसपास, around1
शेखर जोशी की कहानी “गलता लोहा” को याद करके बताइए कि पेशे में लचीलापन न होने की बात उससे कैसे जुड़ती है।
Steps only
कहानी को इस प्रश्न के साथ पढ़ते समय देखें कि पात्र की रुचि, कौशल और सामाजिक पृष्ठभूमि उसके काम के अवसरों को कैसे प्रभावित करते हैं। जहाँ जन्म या परंपरा किसी व्यक्ति के काम को सीमित करती है, वहाँ वह स्थिति आंबेडकर की आलोचना से जुड़ती है। कक्षा में कहानी के किसी प्रसंग का उल्लेख करके तुलना पूरी करें।
Answer
कहानी को इस प्रश्न के साथ पढ़ते समय देखें कि पात्र की रुचि, कौशल और सामाजिक पृष्ठभूमि उसके काम के अवसरों को कैसे प्रभावित करते हैं। जहाँ जन्म या परंपरा किसी व्यक्ति के काम को सीमित करती है, वहाँ वह स्थिति आंबेडकर की आलोचना से जुड़ती है। कक्षा में कहानी के किसी प्रसंग का उल्लेख करके तुलना पूरी करें।
Question पाठ के आसपास, around2
समूह में चर्चा कीजिए कि जाति-प्रथा काम की कुशलता और अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकती है। मुख्य बिंदु लिखिए।
Steps only
संभावित बिंदु: (1) व्यक्ति की रुचि और योग्यता के अनुसार काम चुनने का अवसर घटता है। (2) प्रशिक्षण और प्रतिभा का उपयोग नहीं हो पाता। (3) काम बदलने की स्वतंत्रता न होने से नई तकनीक और रोजगार के साथ तालमेल कठिन होता है। (4) भेदभाव से लोगों की भागीदारी और समाज का सामूहिक उत्पादन कमजोर पड़ता है। उदाहरणों पर चर्चा करते समय किसी समुदाय के बारे में सामान्यीकरण न करें।
Answer
संभावित बिंदु: (1) व्यक्ति की रुचि और योग्यता के अनुसार काम चुनने का अवसर घटता है। (2) प्रशिक्षण और प्रतिभा का उपयोग नहीं हो पाता। (3) काम बदलने की स्वतंत्रता न होने से नई तकनीक और रोजगार के साथ तालमेल कठिन होता है। (4) भेदभाव से लोगों की भागीदारी और समाज का सामूहिक उत्पादन कमजोर पड़ता है। उदाहरणों पर चर्चा करते समय किसी समुदाय के बारे में सामान्यीकरण न करें।
इन्हें भी जानें
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Question इन्हें भी जानें, extra1
आंबेडकर की “जातिभेद का उच्छेद” और इस विषय पर गांधीजी के साथ उनके संवाद के बारे में पढ़कर मुख्य मतभेद व समान उद्देश्य लिखिए।
Steps only
दोनों अस्पृश्यता और अपमान का विरोध करते थे। आंबेडकर जाति-व्यवस्था समाप्त करना चाहते थे; गांधीजी ने कुछ समय तक वर्ण-व्यवस्था को सुधारने की बात की।
Answer
दोनों अस्पृश्यता और अपमान का विरोध करते थे। आंबेडकर जाति-व्यवस्था समाप्त करना चाहते थे; गांधीजी ने कुछ समय तक वर्ण-व्यवस्था को सुधारने की बात की।
Question इन्हें भी जानें, extra2
गांधीजी की “हिंद स्वराज” पढ़कर लिखिए कि उसमें आदर्श समाज की कल्पना किस तरह प्रस्तुत होती है।
Steps only
गांधीजी स्वराज को आत्मसंयम और जिम्मेदार जीवन से जोड़ते हैं। आंबेडकर स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और जाति-आधारित असमानता मिटाने पर जोर देते हैं।
Answer
गांधीजी स्वराज को आत्मसंयम और जिम्मेदार जीवन से जोड़ते हैं। आंबेडकर स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और जाति-आधारित असमानता मिटाने पर जोर देते हैं।