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कक्षा 12 · Antral Bhag 2 · अध्याय 1

सूरदास की झोंपड़ी — प्रेमचंद

प्रेमचंद के उपन्यास-अंश पर सरल उत्तर: ईर्ष्या, अन्याय और सूरदास का फिर से उठ खड़े होने का साहस।

9 उत्तरसरल हिंदी

9 worked answers · short steps first, explanations when you need them

प्रश्न-अभ्यास

Textbook pages NCERT अंतराल भाग 2, अध्याय 1

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 1

“चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता?” नायकराम के कथन में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।

Steps only

जगधर आग लगने को चूल्हे की लापरवाही बताने की कोशिश करता है। नायकराम व्यंग्य से कहता है कि यदि चूल्हा बुझा होता तो दुश्मन का मन कैसे शांत होता। उसका संकेत है कि यह दुर्घटना नहीं, किसी की शत्रुता से की गई आगजनी है।

Answer

जगधर आग लगने को चूल्हे की लापरवाही बताने की कोशिश करता है। नायकराम व्यंग्य से कहता है कि यदि चूल्हा बुझा होता तो दुश्मन का मन कैसे शांत होता। उसका संकेत है कि यह दुर्घटना नहीं, किसी की शत्रुता से की गई आगजनी है।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 2

भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी क्यों जलाई?

Steps only

भैरों की पत्नी सुभागी मार से बचने के लिए सूरदास की झोंपड़ी में आ गई थी। सूरदास ने उसे भैरों से बचाया। भैरों ने इसे अपमान समझा और सूरदास से बदला लेने की ठानी। उसी ईर्ष्या और क्रोध में उसने झोंपड़ी में आग लगाई और सूरदास की जमा-पूँजी भी चुरा ली।

Answer

भैरों की पत्नी सुभागी मार से बचने के लिए सूरदास की झोंपड़ी में आ गई थी। सूरदास ने उसे भैरों से बचाया। भैरों ने इसे अपमान समझा और सूरदास से बदला लेने की ठानी। उसी ईर्ष्या और क्रोध में उसने झोंपड़ी में आग लगाई और सूरदास की जमा-पूँजी भी चुरा ली।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 3

“यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी।” संदर्भ सहित विवेचन कीजिए।

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आग बुझने के बाद सूरदास अपनी झोंपड़ी की राख के पास बैठा है। झोंपड़ी के साथ उसकी उम्रभर की कमाई वाली पोटली भी खो गई। वह उस धन से पितरों का संस्कार करना और मिठुआ का घर बसाना चाहता था। इसलिए राख केवल फूस की नहीं, उसके भविष्य की आशाओं की भी थी।

Answer

आग बुझने के बाद सूरदास अपनी झोंपड़ी की राख के पास बैठा है। झोंपड़ी के साथ उसकी उम्रभर की कमाई वाली पोटली भी खो गई। वह उस धन से पितरों का संस्कार करना और मिठुआ का घर बसाना चाहता था। इसलिए राख केवल फूस की नहीं, उसके भविष्य की आशाओं की भी थी।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 4

जगधर के मन में किस तरह का ईर्ष्या-भाव जगा और क्यों?

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जगधर सूरदास को सुख से रहता देखकर ईर्ष्या करता था। सुभागी के उसकी झोंपड़ी में रहने से उठी चर्चा ने उसकी जलन बढ़ाई। सूरदास की बचत का पता चलने पर ईर्ष्या और बढ़ गई।

Answer

जगधर सूरदास को सुख से रहता देखकर ईर्ष्या करता था। सुभागी के उसकी झोंपड़ी में रहने से उठी चर्चा ने उसकी जलन बढ़ाई। सूरदास की बचत का पता चलने पर ईर्ष्या और बढ़ गई।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 5

सूरदास जगधर से अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था?

Steps only

सूरदास को लगता था कि भिखारी के लिए धन जमा करना अपमान की बात है। वह अपनी बचत से अच्छे काम करना चाहता था, पर चाहता था कि लोग इसे भगवान की सहायता समझें। इसलिए उसने अपनी पोटली और हानि छिपाई।

Answer

सूरदास को लगता था कि भिखारी के लिए धन जमा करना अपमान की बात है। वह अपनी बचत से अच्छे काम करना चाहता था, पर चाहता था कि लोग इसे भगवान की सहायता समझें। इसलिए उसने अपनी पोटली और हानि छिपाई।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 6

“सूरदास उठ खड़ा हुआ और विजय-गर्व की तरंग में राख के ढेर को… उड़ाने लगा।” इस प्रसंग में उसकी मनोदशा बताइए।

Steps only

पहले सूरदास अपनी पोटली और सपनों के नष्ट होने पर दुखी होकर रोता है। मिठुआ उसे याद दिलाता है कि खेल में हारने पर भी खिलाड़ी मैदान नहीं छोड़ता। सूरदास को अपनी कमजोरी का एहसास होता है। वह रोना छोड़कर राख उड़ाता है, मानो हार और दुख को पीछे धकेल रहा हो। अब वह फिर से घर बनाने के लिए तैयार है।

Answer

पहले सूरदास अपनी पोटली और सपनों के नष्ट होने पर दुखी होकर रोता है। मिठुआ उसे याद दिलाता है कि खेल में हारने पर भी खिलाड़ी मैदान नहीं छोड़ता। सूरदास को अपनी कमजोरी का एहसास होता है। वह रोना छोड़कर राख उड़ाता है, मानो हार और दुख को पीछे धकेल रहा हो। अब वह फिर से घर बनाने के लिए तैयार है।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 7

“तो हम सौ लाख बार बनाएँगे” कथन के आधार पर सूरदास के चरित्र का विवेचन कीजिए।

Steps only

सूरदास धैर्यवान, आशावादी और मेहनती है। वह जानता है कि झोंपड़ी जलाई गई है, फिर भी बदला लेने के बजाय उसे दोबारा बनाने की बात करता है। सौ लाख बार बनाने का उत्तर उसकी अटूट जिजीविषा दिखाता है। वह हारकर बैठना नहीं, फिर से शुरू करना जानता है।

Answer

सूरदास धैर्यवान, आशावादी और मेहनती है। वह जानता है कि झोंपड़ी जलाई गई है, फिर भी बदला लेने के बजाय उसे दोबारा बनाने की बात करता है। सौ लाख बार बनाने का उत्तर उसकी अटूट जिजीविषा दिखाता है। वह हारकर बैठना नहीं, फिर से शुरू करना जानता है।

योग्यता-विस्तार

Textbook pages NCERT अंतराल भाग 2, अध्याय 1

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 8

इस पाठ का नाट्य रूपांतर कर प्रस्तुति के लिए रूपरेखा बनाइए।

Steps only

दृश्य 1: झोंपड़ी में आग। दृश्य 2: सूरदास पोटली ढूँढ़ता है। दृश्य 3: जगधर से बातचीत में वह हानि छिपाता है। दृश्य 4: मिठुआ की बात से हिम्मत पाकर वह नया घर बनाने का निश्चय करता है। आग को प्रकाश/ध्वनि से दिखाएँ, असली आग से नहीं।

Answer

दृश्य 1: झोंपड़ी में आग। दृश्य 2: सूरदास पोटली ढूँढ़ता है। दृश्य 3: जगधर से बातचीत में वह हानि छिपाता है। दृश्य 4: मिठुआ की बात से हिम्मत पाकर वह नया घर बनाने का निश्चय करता है। आग को प्रकाश/ध्वनि से दिखाएँ, असली आग से नहीं।

Question प्रश्न-अभ्यास / योग्यता-विस्तार, 9

प्रेमचंद के उपन्यास “रंगभूमि” का संक्षिप्त संस्करण पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया लिखिए।

Steps only

यह पठन-गतिविधि है। नमूना प्रतिक्रिया: “सूरदास की झोंपड़ी” पढ़ने के बाद मैं जानना चाहता/चाहती हूँ कि उपन्यास में सूरदास और उसके आसपास के लोगों की कहानी आगे कैसे बढ़ती है। पढ़ते समय मुख्य पात्रों, उनके संघर्ष और समाज में धन तथा शक्ति के प्रभाव पर नोट बनाऊँगा/बनाऊँगी। अपना निष्कर्ष पढ़ी हुई सामग्री के आधार पर लिखें।

Answer

यह पठन-गतिविधि है। नमूना प्रतिक्रिया: “सूरदास की झोंपड़ी” पढ़ने के बाद मैं जानना चाहता/चाहती हूँ कि उपन्यास में सूरदास और उसके आसपास के लोगों की कहानी आगे कैसे बढ़ती है। पढ़ते समय मुख्य पात्रों, उनके संघर्ष और समाज में धन तथा शक्ति के प्रभाव पर नोट बनाऊँगा/बनाऊँगी। अपना निष्कर्ष पढ़ी हुई सामग्री के आधार पर लिखें।

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