कक्षा 12 · Antra · अध्याय 3
यह दीप अकेला; मैंने देखा, एक बूँद — अज्ञेय
अज्ञेय की कविताओं में व्यक्ति और समाज के संबंध तथा जीवन के छोटे क्षणों का महत्त्व सरल उत्तरों से समझें।
16 उत्तरसरल हिंदी
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यह दीप अकेला
Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 3
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 1
‘दीप अकेला’ के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?
दीप व्यक्ति का प्रतीक है: वह प्रेम देता है, अपनी पहचान पर गर्व करता है और आत्मविश्वास से भरा है।
Answer
दीप व्यक्ति का प्रतीक है; उसका प्रेम, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास उसे स्नेहभरा, गर्वभरा और मदमाता बनाते हैं।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 2
“यह दीप अकेला है, पर इसको भी पंक्ति को दे दो” के आधार पर व्यष्टि का समष्टि में विलय क्यों और कैसे संभव है?
व्यक्ति अपनी पहचान रखते हुए समाज के साथ योगदान दे, तो उसका गुण सबके काम आता है।
Answer
समाज से जुड़कर व्यक्ति अपनी प्रतिभा साझा करता है; इससे व्यक्ति और समूह दोनों मजबूत होते हैं।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 3
‘गीत’ और ‘मोती’ की सार्थकता किससे जुड़ी है?
गीत का गाया जाना और मोती का बाहर लाया जाना उनकी सार्थकता से जुड़ा है।
Answer
गीत गाने से और मोती खोजकर निकालने से सार्थक होते हैं।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 4
“यह अद्वितीय–यह मेरा–यह मैं स्वयं विसर्जित” पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।
अपनी अलग प्रतिभा को समाज के हित में लगाना व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता है।
Answer
स्वेच्छा से अपनी प्रतिभा समाज के लिए देना व्यक्ति और समाज दोनों के लिए उपयोगी है।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 5
‘यह मधु है ... तकता निर्भय’ पंक्तियों के आधार पर बताइए कि ‘मधु’, ‘गोरस’ और ‘अंकुर’ की क्या विशेषता है?
मधु मिठास और संचित अनुभव, गोरस पोषण और अंकुर नई आशा व निर्भय विकास का प्रतीक है।
Answer
मधु में मिठास, गोरस में पोषण और अंकुर में नई शुरुआत का गुण है।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 6(क)
“यह प्रकृत, स्वयंभू ... शक्ति को दे दो।” का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
अंकुर मौलिक और आत्मनिर्भर प्रतिभा का प्रतीक है, जिसे आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।
Answer
कवि स्वाभाविक प्रतिभा को पहचानकर समाज की शक्ति से जोड़ने का भाव व्यक्त करते हैं।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 6(ख)
“यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक ... चिर-अखंड अपनापा।” का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
यह अंश करुणाशील, जागरूक और सबके प्रति अपनापन रखने वाले मनुष्य का गुणगान करता है।
Answer
दुख में भी करुणा और अपनापन बनाए रखना मनुष्य की बड़ी शक्ति है।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 6(ग)
“जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।” का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
कवि जिज्ञासा, विवेक और विनम्र श्रद्धा से युक्त व्यक्ति को समाज की भलाई से जोड़ना चाहते हैं।
Answer
जिज्ञासा और विवेक के साथ श्रद्धा हो, तो व्यक्ति का ज्ञान समाज के हित में काम आता है।
Question यह दीप अकेला, प्रश्न 7
‘यह दीप अकेला’ एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर ‘लघु मानव’ के अस्तित्व और महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
साधारण व्यक्ति की अपनी पहचान और क्षमता है; उसका सम्मान और समाज में योगदान दोनों जरूरी हैं।
Answer
लघु मानव सामान्य व्यक्ति है, जिसकी स्वतंत्र पहचान और सामूहिक योगदान समाज को महत्वपूर्ण बनाते हैं।
मैंने देखा, एक बूँद
Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 3
Question मैंने देखा, एक बूँद, प्रश्न 1
‘सागर’ और ‘बूँद’ से कवि का क्या आशय है?
सागर विशाल अस्तित्व और बूँद छोटे, क्षणिक अस्तित्व का प्रतीक है।
Answer
सागर व्यापकता और बूँद छोटे व्यक्ति या क्षणिक अस्तित्व का संकेत है।
Question मैंने देखा, एक बूँद, प्रश्न 2
“रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से” के आधार पर बूँद के क्षणभर रंगने की सार्थकता बताइए।
क्षणभर का प्रकाश बूँद की सुंदरता दिखाता है और बताता है कि छोटे क्षण भी मूल्यवान होते हैं।
Answer
उसका क्षणिक चमकना दिखाता है कि थोड़े समय का सुंदर अनुभव भी सार्थक हो सकता है।
Question मैंने देखा, एक बूँद, प्रश्न 3
“सूने विराट् के सम्मुख ... नश्वरता के दाग से!” का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
विशालता के सामने बूँद का प्रकाशमय क्षण उसे क्षणिकता के भय से ऊपर उठाकर अर्थ देता है।
Answer
छोटा जीवन भी प्रकाश और अपनापन के क्षणों से सार्थक हो सकता है।
Question मैंने देखा, एक बूँद, प्रश्न 4
‘क्षण के महत्त्व’ को उजागर करते हुए कविता का मूल भाव लिखिए।
कविता कहती है कि जीवन का छोटा-सा प्रकाशमय क्षण भी बहुत अर्थपूर्ण हो सकता है।
Answer
क्षणिक अनुभव भी गहरा अर्थ और सुंदरता दे सकते हैं।
योग्यता-विस्तार
Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 3
Question योग्यता-विस्तार, प्रश्न 1
अज्ञेय की ‘नदी के द्वीप’ और ‘हरी घास पर क्षणभर’ कविताएँ पढ़कर कक्षा की भित्ति-पत्रिका के लिए प्रस्तुति तैयार कीजिए।
दोनों कविताएँ पढ़कर प्रकृति या समय पर अपनी छोटी टिप्पणी और मौलिक चित्र भित्ति-पत्रिका में लगाएँ।
Answer
यह खुली गतिविधि है; प्रस्तुति अपनी भाषा में तैयार करें।
Question योग्यता-विस्तार, प्रश्न 2
‘मानव और समाज’ विषय पर परिचर्चा कीजिए।
व्यक्ति अपनी पहचान बनाए रखे और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए समाज में सहयोग दे।
Answer
व्यक्ति और समाज एक-दूसरे को मजबूत करते हैं; स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।
Question योग्यता-विस्तार, प्रश्न 3
भारतीय दर्शन में ‘सागर’ और ‘बूँद’ के संदर्भ के बारे में जानिए।
बूँद और सागर को व्यक्ति और व्यापक जगत के रूपक के रूप में पढ़ा जा सकता है; व्याख्या दर्शन-परंपरा के अनुसार बदलती है।
Answer
यह रूपक सीमित व्यक्ति और व्यापक अस्तित्व का संबंध दिखा सकता है; स्रोत के अनुसार अर्थ बदलता है।