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कक्षा 12 · Antra · अध्याय 17

कुटज — हजारी प्रसाद द्विवेदी

हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध पर सरल उत्तर: कुटज की जीवनी-शक्ति, स्वावलंबन और मन का संतुलन।

18 उत्तरसरल हिंदी

18 worked answers · short steps first, explanations when you need them

प्रश्न-अभ्यास

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 17

Question प्रश्न-अभ्यास, 1

कुटज को ‘गाढ़े के साथी’ क्यों कहा गया है?

Steps only

कुटज कठिन समय में भी फूलता और जीवित रहता है। कालिदास को रामगिरि पर दूसरे ताजे फूल न मिले तो कुटज के फूल ही काम आए। इसलिए लेखक उसे संकट के समय साथ देने वाला साथी कहते हैं।

Answer

कुटज कठिन समय में भी फूलता और जीवित रहता है। कालिदास को रामगिरि पर दूसरे ताजे फूल न मिले तो कुटज के फूल ही काम आए। इसलिए लेखक उसे संकट के समय साथ देने वाला साथी कहते हैं।

Question प्रश्न-अभ्यास, 2

‘नाम’ क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।

Steps only

रूप किसी व्यक्ति या वस्तु की दिखाई देने वाली पहचान है, जबकि नाम को समाज स्वीकार करता है। नाम के साथ इतिहास और लोगों की साझा स्मृति जुड़ जाती है। इसलिए लेखक के अनुसार नाम केवल शब्द नहीं, समाज की स्वीकृति और पहचान का चिह्न भी है।

Answer

रूप किसी व्यक्ति या वस्तु की दिखाई देने वाली पहचान है, जबकि नाम को समाज स्वीकार करता है। नाम के साथ इतिहास और लोगों की साझा स्मृति जुड़ जाती है। इसलिए लेखक के अनुसार नाम केवल शब्द नहीं, समाज की स्वीकृति और पहचान का चिह्न भी है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 3

‘कुट’, ‘कुटज’ और ‘कुटनी’ शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।

Steps only

लेखक शब्दों की जड़ों पर विचार करते हैं। ‘कुट’ का अर्थ घड़ा या घर बताया गया है। ‘कुटज’ को ‘कुट’ से उत्पन्न कहा जा सकता है; अगस्त्य मुनि के लिए भी यह शब्द आता है। ‘कुटनी’ शब्द दासी/कपटपूर्ण स्त्री के अर्थ में जुड़ा है। लेखक इन समान ध्वनियों के सहारे शब्दों की संभावित उत्पत्ति पर प्रश्न करते हैं, पर इसे निश्चित व्युत्पत्ति नहीं बताते।

Answer

लेखक शब्दों की जड़ों पर विचार करते हैं। ‘कुट’ का अर्थ घड़ा या घर बताया गया है। ‘कुटज’ को ‘कुट’ से उत्पन्न कहा जा सकता है; अगस्त्य मुनि के लिए भी यह शब्द आता है। ‘कुटनी’ शब्द दासी/कपटपूर्ण स्त्री के अर्थ में जुड़ा है। लेखक इन समान ध्वनियों के सहारे शब्दों की संभावित उत्पत्ति पर प्रश्न करते हैं, पर इसे निश्चित व्युत्पत्ति नहीं बताते।

Question प्रश्न-अभ्यास, 4

कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?

Steps only

कुटज सूखी चट्टानों और तेज गर्मी में भी हरा-भरा रहता है। उसकी जड़ें कठोर पत्थरों के बीच से पानी और पोषण खोज लेती हैं। वह कठिनाई के आगे झुकता नहीं, बल्कि अपने बल पर फूलता है। उसका जीवन ही उसकी अटूट शक्ति का प्रमाण है।

Answer

कुटज सूखी चट्टानों और तेज गर्मी में भी हरा-भरा रहता है। उसकी जड़ें कठोर पत्थरों के बीच से पानी और पोषण खोज लेती हैं। वह कठिनाई के आगे झुकता नहीं, बल्कि अपने बल पर फूलता है। उसका जीवन ही उसकी अटूट शक्ति का प्रमाण है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 5

‘कुटज’ हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।

Steps only

कुटज सिखाता है कि कठिन हालात में भी आत्मविश्वास और स्वावलंबन बनाए रखना चाहिए। अपने हिस्से का जीवन सम्मान से जीना चाहिए और सुख-दुख से बहुत विचलित नहीं होना चाहिए। दूसरों के लिए भी जीना और अपने स्वार्थ से आगे सोचना जरूरी है।

Answer

कुटज सिखाता है कि कठिन हालात में भी आत्मविश्वास और स्वावलंबन बनाए रखना चाहिए। अपने हिस्से का जीवन सम्मान से जीना चाहिए और सुख-दुख से बहुत विचलित नहीं होना चाहिए। दूसरों के लिए भी जीना और अपने स्वार्थ से आगे सोचना जरूरी है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 6

कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?

Steps only

कुटज हमें सिखाता है कि साधन कम हों तब भी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से आगे बढ़ा जा सकता है। हमें परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए। साथ ही सफलता का उपयोग केवल अपने लाभ के लिए न करके दूसरों के हित में भी करना चाहिए।

Answer

कुटज हमें सिखाता है कि साधन कम हों तब भी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से आगे बढ़ा जा सकता है। हमें परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए। साथ ही सफलता का उपयोग केवल अपने लाभ के लिए न करके दूसरों के हित में भी करना चाहिए।

Question प्रश्न-अभ्यास, 7

कुटज क्या केवल जी रहा है? इस प्रश्न से लेखक ने किन मानवीय कमजोरियों पर टिप्पणी की है?

Steps only

लेखक बताता है कि मनुष्य अक्सर केवल स्वार्थ के लिए जीने लगता है। वह खुशामद, चापलूसी और दिखावे से अपना लाभ खोजता है। कुटज इनमें से कुछ नहीं करता; वह सरलता और स्वाभिमान से जीता है। इस तुलना से लेखक मनुष्य की पराधीनता और स्वार्थी व्यवहार पर प्रश्न उठाते हैं।

Answer

लेखक बताता है कि मनुष्य अक्सर केवल स्वार्थ के लिए जीने लगता है। वह खुशामद, चापलूसी और दिखावे से अपना लाभ खोजता है। कुटज इनमें से कुछ नहीं करता; वह सरलता और स्वाभिमान से जीता है। इस तुलना से लेखक मनुष्य की पराधीनता और स्वार्थी व्यवहार पर प्रश्न उठाते हैं।

Question प्रश्न-अभ्यास, 8

लेखक क्यों मानता है कि स्वार्थ से भी बढ़कर, जिजीविषा से भी प्रचंड कोई शक्ति है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।

Steps only

जीते रहने की इच्छा जरूरी है, पर लेखक मानता है कि प्रेम, त्याग और दूसरों के लिए काम करने की भावना भी मनुष्य को प्रेरित करती है। यदि हर काम केवल निजी लाभ के लिए होता, तो सेवा, कला और समाजहित के प्रयास संभव न होते। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति अपना समय देकर दूसरों को पढ़ाता है; उसे केवल धन नहीं, दूसरों की उन्नति से भी खुशी मिलती है।

Answer

जीते रहने की इच्छा जरूरी है, पर लेखक मानता है कि प्रेम, त्याग और दूसरों के लिए काम करने की भावना भी मनुष्य को प्रेरित करती है। यदि हर काम केवल निजी लाभ के लिए होता, तो सेवा, कला और समाजहित के प्रयास संभव न होते। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति अपना समय देकर दूसरों को पढ़ाता है; उसे केवल धन नहीं, दूसरों की उन्नति से भी खुशी मिलती है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 9

‘कुटज’ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि ‘दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं।’

Steps only

लेखक के अनुसार सुख-दुख केवल बाहरी घटनाओं से तय नहीं होते; मन उन्हें कैसे ग्रहण करता है, यह भी महत्त्वपूर्ण है। जो व्यक्ति अपने मन को सँभालता है, वह कठिन समय में भी धैर्य रख सकता है। कुटज विपरीत मौसम में भी प्रसन्न और स्थिर रहता है। इसका अर्थ यह नहीं कि कठिनाई वास्तविक नहीं होती, बल्कि मन का संतुलन उसके असर को बदल सकता है।

Answer

लेखक के अनुसार सुख-दुख केवल बाहरी घटनाओं से तय नहीं होते; मन उन्हें कैसे ग्रहण करता है, यह भी महत्त्वपूर्ण है। जो व्यक्ति अपने मन को सँभालता है, वह कठिन समय में भी धैर्य रख सकता है। कुटज विपरीत मौसम में भी प्रसन्न और स्थिर रहता है। इसका अर्थ यह नहीं कि कठिनाई वास्तविक नहीं होती, बल्कि मन का संतुलन उसके असर को बदल सकता है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 10

“कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफी गहरी पैठी रहती हैं…” सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

Steps only

लेखक सूखी चट्टानों पर खड़े कुटज को देखकर यह बात कहते हैं। बाहर से वह छोटा और कठोर दिखता है, लेकिन उसकी जड़ें बहुत भीतर तक जाती हैं और वहाँ से पोषण खींचती हैं। यह दृश्य बताता है कि साधारण दिखने वाले जीव या व्यक्ति के भीतर भी गहरी शक्ति हो सकती है।

Answer

लेखक सूखी चट्टानों पर खड़े कुटज को देखकर यह बात कहते हैं। बाहर से वह छोटा और कठोर दिखता है, लेकिन उसकी जड़ें बहुत भीतर तक जाती हैं और वहाँ से पोषण खींचती हैं। यह दृश्य बताता है कि साधारण दिखने वाले जीव या व्यक्ति के भीतर भी गहरी शक्ति हो सकती है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 10(क)

“रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य…” सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

Steps only

कुटज का नाम याद करने की कोशिश करते हुए लेखक नाम और रूप के संबंध पर सोचते हैं। रूप से किसी वस्तु की व्यक्तिगत पहचान होती है, जबकि नाम समाज की स्वीकृति से प्रचलित होता है। नाम इतिहास और सामूहिक स्मृति में स्थान पाता है। इसलिए लेखक को कुटज का सही नाम जानना जरूरी लगता है।

Answer

कुटज का नाम याद करने की कोशिश करते हुए लेखक नाम और रूप के संबंध पर सोचते हैं। रूप से किसी वस्तु की व्यक्तिगत पहचान होती है, जबकि नाम समाज की स्वीकृति से प्रचलित होता है। नाम इतिहास और सामूहिक स्मृति में स्थान पाता है। इसलिए लेखक को कुटज का सही नाम जानना जरूरी लगता है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 10(ख)

“चारों ओर… धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है…” सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

Steps only

लेखक गर्म और पथरीले शिवालिक क्षेत्र में कुटज की हरियाली देखते हैं। आसपास की कठोरता के बावजूद वह चट्टानों के भीतर से नमी और रस खींचकर जीवित है। यह वर्णन उसकी सुंदरता से अधिक उसकी जिजीविषा और स्वावलंबन को उभारता है।

Answer

लेखक गर्म और पथरीले शिवालिक क्षेत्र में कुटज की हरियाली देखते हैं। आसपास की कठोरता के बावजूद वह चट्टानों के भीतर से नमी और रस खींचकर जीवित है। यह वर्णन उसकी सुंदरता से अधिक उसकी जिजीविषा और स्वावलंबन को उभारता है।

Question प्रश्न-अभ्यास, 10(ग)

“हृदयेनापराजितः… अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन-दृष्टि” सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

Steps only

कुटज के जीवन को देखकर लेखक उसके अडिग स्वभाव की प्रशंसा करते हैं। सुख-दुख, प्रिय-अप्रिय—हर स्थिति में मन का संतुलन बनाए रखना ही यहाँ अपराजित हृदय है। कुटज कठिन वातावरण में भी हार नहीं मानता, इसलिए वह लेखक के लिए साहस का उदाहरण बनता है।

Answer

कुटज के जीवन को देखकर लेखक उसके अडिग स्वभाव की प्रशंसा करते हैं। सुख-दुख, प्रिय-अप्रिय—हर स्थिति में मन का संतुलन बनाए रखना ही यहाँ अपराजित हृदय है। कुटज कठिन वातावरण में भी हार नहीं मानता, इसलिए वह लेखक के लिए साहस का उदाहरण बनता है।

योग्यता-विस्तार

Textbook pages NCERT अंतरा भाग 2, अध्याय 17

Question प्रश्न-अभ्यास, 10(घ)

कुटज की तर्ज पर किसी जंगली फूल पर लेख अथवा कविता लिखिए।

Steps only

**बनफूल** पगडंडी के पास छोटा-सा बनफूल चुपचाप खिलता है। न उसे बगीचे की दीवार चाहिए, न माली की देखभाल। धूप और हवा के बीच वह रंग बिखेरता है। राहगीर उसे देखकर ठहरते हैं और समझते हैं कि सुंदरता साधारण जगहों में भी मिलती है।

Answer

बनफूल पगडंडी के पास छोटा-सा बनफूल चुपचाप खिलता है। न उसे बगीचे की दीवार चाहिए, न माली की देखभाल। धूप और हवा के बीच वह रंग बिखेरता है। राहगीर उसे देखकर ठहरते हैं और समझते हैं कि सुंदरता साधारण जगहों में भी मिलती है।

Question योग्यता-विस्तार, 1

लेखक ने अनेक पेड़-पौधों के रहते कुटज को ही क्यों चुना?

Steps only

कुटज साधारण दिखता है और कठिन, सूखी जगह में उगता है, फिर भी उसमें गहरी जीवनी-शक्ति और स्वाभिमान है। लेखक को उसमें मनुष्य के लिए प्रेरक गुण दिखाई देते हैं। इसलिए उन्होंने उसी पौधे को अपने विचार का केंद्र बनाया।

Answer

कुटज साधारण दिखता है और कठिन, सूखी जगह में उगता है, फिर भी उसमें गहरी जीवनी-शक्ति और स्वाभिमान है। लेखक को उसमें मनुष्य के लिए प्रेरक गुण दिखाई देते हैं। इसलिए उन्होंने उसी पौधे को अपने विचार का केंद्र बनाया।

Question योग्यता-विस्तार, 2

कुटज की विशेषताओं वाले दस वाक्यों/विचारों को चुनकर उनका मानवीय संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

Steps only

कुटज के गुण हैं—कठिन जगह में उगना, गर्मी सहना, गहरी जड़ें रखना, पानी खोजना, हरा रहना, फूलना, स्वावलंबी होना, निर्भय होना, सुख-दुख में स्थिर रहना और शान से जीना। मनुष्य के लिए इनके अर्थ हैं—धैर्य, मेहनत, संसाधनों का समझदारी से उपयोग, आत्मनिर्भरता, साहस और आत्मसम्मान।

Answer

कुटज के गुण हैं—कठिन जगह में उगना, गर्मी सहना, गहरी जड़ें रखना, पानी खोजना, हरा रहना, फूलना, स्वावलंबी होना, निर्भय होना, सुख-दुख में स्थिर रहना और शान से जीना। मनुष्य के लिए इनके अर्थ हैं—धैर्य, मेहनत, संसाधनों का समझदारी से उपयोग, आत्मनिर्भरता, साहस और आत्मसम्मान।

Question योग्यता-विस्तार, 3

कुटज के आधार पर सिद्ध कीजिए कि ‘जीना भी एक कला है।’

Steps only

कुटज कठिन पत्थरीली भूमि में भी अपने लिए पानी और पोषण खोजता है। वह अपनी स्थिति का रोना नहीं रोता और न दूसरों पर निर्भर रहता है। वह सहजता और स्वाभिमान से खिलता है। इससे सीख मिलती है कि जीवन की कठिनाइयों में संतुलन, धैर्य, मेहनत और प्रसन्नता बनाए रखना ही जीने की कला है।

Answer

कुटज कठिन पत्थरीली भूमि में भी अपने लिए पानी और पोषण खोजता है। वह अपनी स्थिति का रोना नहीं रोता और न दूसरों पर निर्भर रहता है। वह सहजता और स्वाभिमान से खिलता है। इससे सीख मिलती है कि जीवन की कठिनाइयों में संतुलन, धैर्य, मेहनत और प्रसन्नता बनाए रखना ही जीने की कला है।

Question योग्यता-विस्तार, 4

NCERT की हजारी प्रसाद द्विवेदी पर बनी फिल्म देखकर संक्षिप्त प्रतिक्रिया लिखिए।

Steps only

यह देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया लिखने की गतिविधि है। नमूना: फिल्म से लेखक के जीवन, अध्ययन और साहित्यिक योगदान के बारे में जानकारी मिली। उनके विचारों में भारतीय परंपरा और आधुनिक दृष्टि का मेल दिखाई देता है। फिल्म का कौन-सा प्रसंग आपको सबसे उपयोगी लगा, उसे अपने शब्दों में जोड़ें।

Answer

यह देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया लिखने की गतिविधि है। नमूना: फिल्म से लेखक के जीवन, अध्ययन और साहित्यिक योगदान के बारे में जानकारी मिली। उनके विचारों में भारतीय परंपरा और आधुनिक दृष्टि का मेल दिखाई देता है। फिल्म का कौन-सा प्रसंग आपको सबसे उपयोगी लगा, उसे अपने शब्दों में जोड़ें।

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