Question मौखिक, प्रश्न 1
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होते हैं?
शुद्ध सोने में मिलावट नहीं होती, जबकि गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है।
Answer
शुद्ध सोने में मिलावट नहीं होती, जबकि गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है।
कक्षा 10 · Sparsh · अध्याय 13
“गिन्नी का सोना” और “झेन की देन” के पाठ्यपुस्तक प्रश्नों, भाषा-अभ्यास और गतिविधियों के सरल उत्तर।
30 worked answers · short steps first, explanations when you need them
Textbook pages NCERT स्पर्श भाग 2, अध्याय 13
Question मौखिक, प्रश्न 1
शुद्ध सोने में मिलावट नहीं होती, जबकि गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है।
शुद्ध सोने में मिलावट नहीं होती, जबकि गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है।
Question मौखिक, प्रश्न 2
प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट वह है जो आदर्शों को मानता है और उन्हें वास्तविक जीवन में लागू करने का रास्ता भी खोजता है। पाठ में गांधीजी इसका उदाहरण हैं: वे परिस्थितियाँ समझते थे, पर आदर्शों को लाभ के लिए नहीं छोड़ते थे।
प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट वह है जो आदर्शों को मानता है और उन्हें वास्तविक जीवन में लागू करने का रास्ता भी खोजता है। पाठ में गांधीजी इसका उदाहरण हैं: वे परिस्थितियाँ समझते थे, पर आदर्शों को लाभ के लिए नहीं छोड़ते थे।
Question मौखिक, प्रश्न 3
पाठ में शुद्ध आदर्श का अर्थ है ऐसा ऊँचा सिद्धांत जो सुविधा या लाभ के हिसाब से न बदले। लेखक इसकी तुलना शुद्ध सोने से करता है। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा जैसे आदर्शों को व्यवहार में अपनाया।
पाठ में शुद्ध आदर्श का अर्थ है ऐसा ऊँचा सिद्धांत जो सुविधा या लाभ के हिसाब से न बदले। लेखक इसकी तुलना शुद्ध सोने से करता है। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा जैसे आदर्शों को व्यवहार में अपनाया।
Question मौखिक, प्रश्न 4
जापानियों की तेज़ दिनचर्या और लगातार भागदौड़ के कारण मानसिक तनाव बढ़ता है; इसी को लेखक ने स्पीड का इंजन कहा।
जापानियों की तेज़ दिनचर्या और लगातार भागदौड़ के कारण मानसिक तनाव बढ़ता है; इसी को लेखक ने स्पीड का इंजन कहा।
Question मौखिक, प्रश्न 5
इसे चा-नो-यू कहते हैं।
इसे चा-नो-यू कहते हैं।
Question मौखिक, प्रश्न 6
वह जगह शांत और सादगीपूर्ण होती है; वहाँ चाय की विधि पूरे सम्मान से निभाई जाती है।
वह जगह शांत और सादगीपूर्ण होती है; वहाँ चाय की विधि पूरे सम्मान से निभाई जाती है।
Question लिखित (क), प्रश्न 1
लेखक सोने को शुद्ध आदर्श और ताँबे को व्यवहारिकता का प्रतीक मानता है। गिन्नी के सोने में ताँबा मिलाने से वह रोज़मर्रा के उपयोग के लिए अधिक मज़बूत होता है। इसी तरह व्यवहारिकता आदर्श को जीवन में काम करने योग्य बनाती है—बशर्ते आदर्श का मूल्य कम न हो।
लेखक सोने को शुद्ध आदर्श और ताँबे को व्यवहारिकता का प्रतीक मानता है। गिन्नी के सोने में ताँबा मिलाने से वह रोज़मर्रा के उपयोग के लिए अधिक मज़बूत होता है। इसी तरह व्यवहारिकता आदर्श को जीवन में काम करने योग्य बनाती है—बशर्ते आदर्श का मूल्य कम न हो।
Question लिखित (क), प्रश्न 2
उसने स्वागत किया, बैठने की जगह दी, अंगीठी जलाई, बर्तन साफ़ किए और चाय को शांत ढंग से परोसा।
उसने स्वागत किया, बैठने की जगह दी, अंगीठी जलाई, बर्तन साफ़ किए और चाय को शांत ढंग से परोसा।
Question लिखित (क), प्रश्न 3
तीन लोगों तक को आने दिया जाता था, ताकि समारोह शांत और ध्यानपूर्ण रहे।
तीन लोगों तक को आने दिया जाता था, ताकि समारोह शांत और ध्यानपूर्ण रहे।
Question लिखित (क), प्रश्न 4
लेखक की भागती सोच शांत हुई। वह बीते और आने वाले समय को भूलकर वर्तमान में जीने लगा।
लेखक की भागती सोच शांत हुई। वह बीते और आने वाले समय को भूलकर वर्तमान में जीने लगा।
Question लिखित (ख), प्रश्न 1
गांधीजी सत्य और अहिंसा के आदर्श पर स्वयं चलते थे और लोगों को भी जोड़ते थे। उनके नेतृत्व से आम लोग स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित हुए।
गांधीजी सत्य और अहिंसा के आदर्श पर स्वयं चलते थे और लोगों को भी जोड़ते थे। उनके नेतृत्व से आम लोग स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित हुए।
Question लिखित (ख), प्रश्न 2
सत्य, करुणा, ईमानदारी और सम्मान शाश्वत मूल्य हैं। आज भी वे विश्वास, न्याय और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।
सत्य, करुणा, ईमानदारी और सम्मान शाश्वत मूल्य हैं। आज भी वे विश्वास, न्याय और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।
Question लिखित (ख), प्रश्न 3
नमूना: नकल में मदद न करना सही आदर्श था, भले मित्र नाराज़ हुआ। समूह-कार्य में सबकी राय लेकर काम बाँटने से आदर्श और व्यावहारिकता दोनों निभे।
नमूना: नकल में मदद न करना सही आदर्श था, भले मित्र नाराज़ हुआ। समूह-कार्य में सबकी राय लेकर काम बाँटने से आदर्श और व्यावहारिकता दोनों निभे।
Question लिखित (ख), प्रश्न 4
गांधीजी परिस्थितियों और लोगों की व्यावहारिक जरूरतें समझते थे, लेकिन सत्य और अहिंसा जैसे आदर्श नहीं छोड़ते थे। वे व्यवहार को आदर्शों के अनुरूप उठाते थे। इसलिए लेखक की उपमा में गांधीजी ने सोने में ताँबा नहीं, बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसका मूल्य बढ़ाया।
गांधीजी परिस्थितियों और लोगों की व्यावहारिक जरूरतें समझते थे, लेकिन सत्य और अहिंसा जैसे आदर्श नहीं छोड़ते थे। वे व्यवहार को आदर्शों के अनुरूप उठाते थे। इसलिए लेखक की उपमा में गांधीजी ने सोने में ताँबा नहीं, बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसका मूल्य बढ़ाया।
Question लिखित (ख), प्रश्न 5
आदर्श सही दिशा देते हैं और व्यवहारिकता उन्हें लागू करने में मदद करती है। दोनों का संतुलन ज़रूरी है; सुविधा के लिए बार-बार मूल्य बदलना ठीक नहीं।
आदर्श सही दिशा देते हैं और व्यवहारिकता उन्हें लागू करने में मदद करती है। दोनों का संतुलन ज़रूरी है; सुविधा के लिए बार-बार मूल्य बदलना ठीक नहीं।
Question लिखित (ख), प्रश्न 6
मित्र ने जापान में तेज़ रफ़्तार जीवन, हर काम को जल्दी पूरा करने की होड़ और अकेले में भी लगातार बड़बड़ाते रहने को मानसिक रोगों से जोड़ा। मैं मानता हूँ कि लगातार दबाव और आराम की कमी तनाव बढ़ा सकते हैं। फिर भी मानसिक रोगों के कई कारण होते हैं; उनका आकलन विशेषज्ञ करते हैं।
मित्र ने जापान में तेज़ रफ़्तार जीवन, हर काम को जल्दी पूरा करने की होड़ और अकेले में भी लगातार बड़बड़ाते रहने को मानसिक रोगों से जोड़ा। मैं मानता हूँ कि लगातार दबाव और आराम की कमी तनाव बढ़ा सकते हैं। फिर भी मानसिक रोगों के कई कारण होते हैं; उनका आकलन विशेषज्ञ करते हैं।
Question लिखित (ख), प्रश्न 7
अतीत बीत चुका है और भविष्य अनिश्चित है। वर्तमान ही हमारे सामने है, इसलिए उसे ध्यान और सजगता से जीना चाहिए।
अतीत बीत चुका है और भविष्य अनिश्चित है। वर्तमान ही हमारे सामने है, इसलिए उसे ध्यान और सजगता से जीना चाहिए।
Question आशय, प्रश्न 1
सत्य और न्याय जैसे स्थायी मूल्य आदर्शवादी लोगों के आचरण और योगदान से समाज में टिके रहते हैं।
सत्य और न्याय जैसे स्थायी मूल्य आदर्शवादी लोगों के आचरण और योगदान से समाज में टिके रहते हैं।
Question आशय, प्रश्न 2
जब लोग “व्यावहारिकता” को ही सबसे बड़ा गुण मानने लगते हैं, तब लाभ-हानि के लिए वे अपने आदर्श छोड़ सकते हैं। ऐसे व्यक्ति नाम से आदर्शवादी दिखते हैं, पर व्यवहार में केवल सुविधा और स्वार्थ देखते हैं। लेखक चेताता है कि व्यावहारिकता आदर्शों की दिशा में चले, उन्हें पीछे न धकेले।
जब लोग “व्यावहारिकता” को ही सबसे बड़ा गुण मानने लगते हैं, तब लाभ-हानि के लिए वे अपने आदर्श छोड़ सकते हैं। ऐसे व्यक्ति नाम से आदर्शवादी दिखते हैं, पर व्यवहार में केवल सुविधा और स्वार्थ देखते हैं। लेखक चेताता है कि व्यावहारिकता आदर्शों की दिशा में चले, उन्हें पीछे न धकेले।
Question आशय, प्रश्न 3
लोग हर समय जल्दबाज़ी और प्रतिस्पर्धा में रहते हैं। इससे तनाव बढ़ता है और शांति से जीने का समय घटता है।
लोग हर समय जल्दबाज़ी और प्रतिस्पर्धा में रहते हैं। इससे तनाव बढ़ता है और शांति से जीने का समय घटता है।
Question आशय, प्रश्न 4
चाजीन के हर काम में शांति, लय और सलीका था। उसकी गतिविधियाँ संगीत की तरह सुंदर लगती थीं।
चाजीन के हर काम में शांति, लय और सलीका था। उसकी गतिविधियाँ संगीत की तरह सुंदर लगती थीं।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 1
व्यवहारिकता काम को संभव बनाती है। ईमानदारी मेरा आदर्श है। उसने सूझ-बूझ दिखाई। यह विलक्षण चित्र है। सत्य शाश्वत मूल्य है।
व्यवहारिकता काम को संभव बनाती है। ईमानदारी मेरा आदर्श है। उसने सूझ-बूझ दिखाई। यह विलक्षण चित्र है। सत्य शाश्वत मूल्य है।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 2
माता और पिता; पाप और पुण्य; सुख और दुख; रात और दिन; अन्न और जल; घर और बाहर; देश और विदेश—सभी द्वंद्व समास हैं।
माता और पिता; पाप और पुण्य; सुख और दुख; रात और दिन; अन्न और जल; घर और बाहर; देश और विदेश—सभी द्वंद्व समास हैं।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 3
सफलता, विलक्षणता, व्यावहारिकता, सजगता, आदर्शवादिता, शुद्धता।
सफलता, विलक्षणता, व्यावहारिकता, सजगता, आदर्शवादिता, शुद्धता।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 4
उत्तर—जवाब/दिशा; कर—करना/लगान; अंक—संख्या/नाटक का भाग; नग—रत्न/पर्वत। प्रत्येक अर्थ का एक वाक्य लिखें।
उत्तर—जवाब/दिशा; कर—करना/लगान; अंक—संख्या/नाटक का भाग; नग—रत्न/पर्वत। प्रत्येक अर्थ का एक वाक्य लिखें।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 5
अंगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी। चाय तैयार हुई और उसने प्यालों में भरी। वह बर्तन लाया और उन्हें साफ़ किया।
अंगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी। चाय तैयार हुई और उसने प्यालों में भरी। वह बर्तन लाया और उन्हें साफ़ किया।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 6
चाय पीने की यह एक विधि है जिसे चा-नो-यू कहते हैं। बाहर एक मिट्टी का बर्तन था जिसमें पानी भरा था। जब चाय तैयार हुई, तब उसने प्याले हमारे सामने रखे।
चाय पीने की यह एक विधि है जिसे चा-नो-यू कहते हैं। बाहर एक मिट्टी का बर्तन था जिसमें पानी भरा था। जब चाय तैयार हुई, तब उसने प्याले हमारे सामने रखे।
Question योग्यता विस्तार, प्रश्न 1
गांधीजी की ‘सत्य के प्रयोग’ पढ़ें और सत्य, अहिंसा या सादगी से जुड़ा एक विचार अपने शब्दों में लिखें।
गांधीजी की ‘सत्य के प्रयोग’ पढ़ें और सत्य, अहिंसा या सादगी से जुड़ा एक विचार अपने शब्दों में लिखें।
Question योग्यता विस्तार, प्रश्न 2
शांत कमरा, सादे बर्तन, ध्यान से चाय बनाता मेज़बान और मौन बैठे अतिथि—इनका शब्द-चित्र या अपना चित्र बनाएँ।
शांत कमरा, सादे बर्तन, ध्यान से चाय बनाता मेज़बान और मौन बैठे अतिथि—इनका शब्द-चित्र या अपना चित्र बनाएँ।
Question परियोजना कार्य, प्रश्न 1
नक्शे पर असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि और कांगड़ा दिखाएँ। हर स्थान के सामने वहाँ की चाय की एक विशेषता लिखें और स्रोत दर्ज करें।
नक्शे पर असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि और कांगड़ा दिखाएँ। हर स्थान के सामने वहाँ की चाय की एक विशेषता लिखें और स्रोत दर्ज करें।