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कक्षा 12 · Aroh · अध्याय 6

बादल राग — सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

बादल, वर्षा और बदलाव के प्राकृतिक तथा सामाजिक बिंबों को सरल भाषा में समझें।

11 उत्तरसरल हिंदी

11 worked answers · short steps first, explanations when you need them

कविता के साथ

Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 6

Question कविता के साथ, प्रश्न 1

“अस्थिर सुख पर दुख की छाया” में दुख की छाया किसकी ओर संकेत करती है और क्यों?

Steps only

यहाँ “दुख की छाया” बादलों की छाया के साथ-साथ धनी शोषक वर्ग के अस्थिर सुख पर मंडराते संकट की ओर संकेत करती है। बादलों की गर्जना और वर्षा पुराने अन्याय को बदलने वाली क्रांति का संकेत हैं। इसलिए जिनका सुख दूसरों के शोषण पर टिका है, उन्हें इस बदलाव में अपने सुख के मिटने का डर दिखाई देता है।

Answer

यहाँ “दुख की छाया” बादलों की छाया के साथ-साथ धनी शोषक वर्ग के अस्थिर सुख पर मंडराते संकट की ओर संकेत करती है। बादलों की गर्जना और वर्षा पुराने अन्याय को बदलने वाली क्रांति का संकेत हैं। इसलिए जिनका सुख दूसरों के शोषण पर टिका है, उन्हें इस बदलाव में अपने सुख के मिटने का डर दिखाई देता है।

Question कविता के साथ, प्रश्न 2

“अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर” में किसकी ओर संकेत किया गया है?

Steps only

यह पंक्ति बादलों को वीर योद्धाओं की तरह दिखाती है। बिजली के प्रहार से वे घायल हुए हैं, फिर भी उनका ऊँचा उठना और संघर्ष जारी रखना उनकी हिम्मत बताता है। साथ ही वे उन साहसी लोगों का संकेत हैं जो कठिन चोटों के बाद भी अन्याय के विरुद्ध खड़े रहते हैं।

Answer

यह पंक्ति बादलों को वीर योद्धाओं की तरह दिखाती है। बिजली के प्रहार से वे घायल हुए हैं, फिर भी उनका ऊँचा उठना और संघर्ष जारी रखना उनकी हिम्मत बताता है। साथ ही वे उन साहसी लोगों का संकेत हैं जो कठिन चोटों के बाद भी अन्याय के विरुद्ध खड़े रहते हैं।

Question कविता के साथ, प्रश्न 3

“विप्लव-रव से छोटे ही शोभा पाते” का क्या आशय है? छोटे ही क्यों शोभा पाते हैं?

Steps only

“विप्लव-रव” का अर्थ है क्रांति की गर्जना। उसके साथ छोटे पौधे ही शोभा पाते हैं, क्योंकि वर्षा और बदलाव से सबसे अधिक नया जीवन दबे हुए, छोटे और कमजोर लोगों को मिलता है। पौधों का हिलना, खिलना और हाथ हिलाकर बादलों को बुलाना उनकी खुशी और आशा दिखाता है।

Answer

“विप्लव-रव” का अर्थ है क्रांति की गर्जना। उसके साथ छोटे पौधे ही शोभा पाते हैं, क्योंकि वर्षा और बदलाव से सबसे अधिक नया जीवन दबे हुए, छोटे और कमजोर लोगों को मिलता है। पौधों का हिलना, खिलना और हाथ हिलाकर बादलों को बुलाना उनकी खुशी और आशा दिखाता है।

Question कविता के साथ, प्रश्न 4

बादलों के आने पर प्रकृति में कौन-कौन से बदलाव दिखाई देते हैं?

Steps only

बादल, हवा, गर्जन और वर्षा आते हैं। सूखी धरती को पानी मिलता है और बीजों से नई हरियाली की आशा बनती है।

Answer

बादल, हवा, गर्जन और वर्षा आते हैं। सूखी धरती को पानी मिलता है और बीजों से नई हरियाली की आशा बनती है।

व्याख्या

Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 6

Question व्याख्या, पद्यांश 1

कविता के आरंभिक पद्यांश में हवा-सागर, धरती के दुख और बादलों की बाढ़ वाली माया को कैसे समझेंगे?

Steps only

कविता की शुरुआत में हवा और बादलों का विशाल फैलाव समुद्र जैसा लगता है। धरती पहले से तपन और दुख झेल रही है। बादलों की गर्जना और वर्षा इस दुख को बदलने वाली क्रांतिकारी शक्ति का रूप लेती है। “प्लावित माया” का अर्थ है बादलों का ऐसा फैलाव जो वर्षा और नए जीवन की संभावना लेकर आता है।

Answer

कविता की शुरुआत में हवा और बादलों का विशाल फैलाव समुद्र जैसा लगता है। धरती पहले से तपन और दुख झेल रही है। बादलों की गर्जना और वर्षा इस दुख को बदलने वाली क्रांतिकारी शक्ति का रूप लेती है। “प्लावित माया” का अर्थ है बादलों का ऐसा फैलाव जो वर्षा और नए जीवन की संभावना लेकर आता है।

Question व्याख्या, पद्यांश 2

“अट्टालिका नहीं है रे, आतंक-भवन” वाले पद्यांश में कवि किस बदलाव की बात करते हैं?

Steps only

“अट्टालिका” ऊँची इमारत या महल है। कवि उसे “आतंक-भवन” कहता है क्योंकि उसमें रहने वाला धनी शोषक वर्ग बदलाव और क्रांति से डरता है। इसके विपरीत, कीचड़ में खिला छोटा कमल और रोग-दुख में भी हँसता शिशु साधारण, वंचित लोगों के जीवन और आशा का प्रतीक हैं। वर्षा से आई बाढ़ पुराने ढाँचे को हिला सकती है; कवि बदलाव से छोटे लोगों के नए जीवन की आशा करता है।

Answer

“अट्टालिका” ऊँची इमारत या महल है। कवि उसे “आतंक-भवन” कहता है क्योंकि उसमें रहने वाला धनी शोषक वर्ग बदलाव और क्रांति से डरता है। इसके विपरीत, कीचड़ में खिला छोटा कमल और रोग-दुख में भी हँसता शिशु साधारण, वंचित लोगों के जीवन और आशा का प्रतीक हैं। वर्षा से आई बाढ़ पुराने ढाँचे को हिला सकती है; कवि बदलाव से छोटे लोगों के नए जीवन की आशा करता है।

कला की बात

Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 6

Question कला की बात, प्रश्न 1

कविता में प्रकृति को कई मानवीय रूप मिले हैं। आपको कौन-सा रूप अच्छा लगा और क्यों?

Steps only

मुझे छोटे पौधों का बच्चों जैसा रूप अच्छा लगता है। वे हिलते-खिलते और हाथ हिलाकर बादलों को बुलाते दिखाई देते हैं। इससे वर्षा के बाद धरती पर लौटती खुशी और नई आशा समझ आती है। यह एक नमूना है; विद्यार्थी कविता का कोई अन्य मानवीय रूप चुन सकते हैं।

Answer

मुझे छोटे पौधों का बच्चों जैसा रूप अच्छा लगता है। वे हिलते-खिलते और हाथ हिलाकर बादलों को बुलाते दिखाई देते हैं। इससे वर्षा के बाद धरती पर लौटती खुशी और नई आशा समझ आती है। यह एक नमूना है; विद्यार्थी कविता का कोई अन्य मानवीय रूप चुन सकते हैं।

Question कला की बात, प्रश्न 2

कविता में जहाँ-जहाँ रूपक अलंकार है, उनसे जुड़े छोटे पद चुनकर लिखिए।

Steps only

कविता में रूपक के कुछ स्पष्ट उदाहरण हैं: • “विप्लव के बादल” — बादलों को सीधे क्रांति की शक्ति कहा गया है। • “विप्लव के वीर” — बादलों को वीर योद्धा माना गया है। • “जीवन के पारावार” — बादलों को जीवन के विशाल सागर के रूप में रखा गया है। • “अट्टालिका नहीं है रे / आतंक-भवन” — महल को भय का घर कहा गया है। इन रूपकों से बादलों की वर्षा सामाजिक बदलाव और नए जीवन से जुड़ती है।

Answer

कविता में रूपक के कुछ स्पष्ट उदाहरण हैं: • “विप्लव के बादल” — बादलों को सीधे क्रांति की शक्ति कहा गया है। • “विप्लव के वीर” — बादलों को वीर योद्धा माना गया है। • “जीवन के पारावार” — बादलों को जीवन के विशाल सागर के रूप में रखा गया है। • “अट्टालिका नहीं है रे / आतंक-भवन” — महल को भय का घर कहा गया है। इन रूपकों से बादलों की वर्षा सामाजिक बदलाव और नए जीवन से जुड़ती है।

Question कला की बात, प्रश्न 3

बादल-राग के अन्य खंडों में बादलों को दिए गए अलग-अलग संबोधनों का अर्थ और औचित्य समझाइए।

Steps only

इन संबोधनों से बादलों के अलग-अलग गुण समझ आते हैं: • “ऐ विप्लव के वीर” — बादल साहसी योद्धा की तरह अन्याय से लड़ते हैं। • “ऐ जीवन के पारावार” — वे पानी और जीवन के विशाल स्रोत हैं। • “अरे वर्ष के हर्ष” — वर्षा से धरती को आनंद मिलता है। • “मेरे पागल बादल” — उनकी तेज़, चंचल चाल दिखती है। • “ऐ निद्रित” — वे कुछ समय शांत या सोए हुए लगते हैं। • “ऐ स्वच्छंद” — वे स्वतंत्र होकर आकाश में घूमते हैं। • “ऐ उद्दाम” — उनकी शक्ति रुकने वाली नहीं है। • “ऐ सम्राट” — उनका विशाल और प्रभावशाली रूप सामने आता है। • “ऐ विप्लव के प्लावन” — उनकी वर्षा पुराने ढाँचे को बहाकर बदलाव ला सकती है। • “ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार” — वे असीम आकाश में खेलते कोमल, चंचल बालक जैसे हैं।

Answer

इन संबोधनों से बादलों के अलग-अलग गुण समझ आते हैं: • “ऐ विप्लव के वीर” — बादल साहसी योद्धा की तरह अन्याय से लड़ते हैं। • “ऐ जीवन के पारावार” — वे पानी और जीवन के विशाल स्रोत हैं। • “अरे वर्ष के हर्ष” — वर्षा से धरती को आनंद मिलता है। • “मेरे पागल बादल” — उनकी तेज़, चंचल चाल दिखती है। • “ऐ निद्रित” — वे कुछ समय शांत या सोए हुए लगते हैं। • “ऐ स्वच्छंद” — वे स्वतंत्र होकर आकाश में घूमते हैं। • “ऐ उद्दाम” — उनकी शक्ति रुकने वाली नहीं है। • “ऐ सम्राट” — उनका विशाल और प्रभावशाली रूप सामने आता है। • “ऐ विप्लव के प्लावन” — उनकी वर्षा पुराने ढाँचे को बहाकर बदलाव ला सकती है। • “ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार” — वे असीम आकाश में खेलते कोमल, चंचल बालक जैसे हैं।

Question कला की बात, प्रश्न 4

कवि बादलों को एक रूप में देखता है। आप बादलों के लिए अपना कोई कल्पित बिंब दीजिए।

Steps only

नमूना: बादल पानी के संदेश लेकर खेतों तक जाने वाले डाकिए हैं। आप अपना नया बिंब लिखें।

Answer

नमूना: बादल पानी के संदेश लेकर खेतों तक जाने वाले डाकिए हैं। आप अपना नया बिंब लिखें।

Question कला की बात, प्रश्न 5

कविता से कुछ अन्य विशेषण चुनकर बताइए कि वे अपने संज्ञा-पद का अर्थ कैसे बदलते हैं।

Steps only

• “अस्थिर सुख” में अस्थिर बताता है कि धनी वर्ग का सुख टिकाऊ नहीं है। • “दग्ध हृदय” धरती की तपन और लोगों की गहरी पीड़ा दिखाता है। • “सुप्त अंकुर” मिट्टी में छिपी नई जीवन-आशा बताता है। • “उन्नत वीर” बादलों की ऊँची, साहसी मुद्रा दिखाता है। • “क्षत-विक्षत” शरीर चोटों से घायल होने का चित्र देता है। • “सुकुमार शरीर” शिशु की कोमलता और मासूमियत दिखाता है। इन विशेषणों से दृश्य अधिक स्पष्ट और भाव अधिक गहरे होते हैं।

Answer

• “अस्थिर सुख” में अस्थिर बताता है कि धनी वर्ग का सुख टिकाऊ नहीं है। • “दग्ध हृदय” धरती की तपन और लोगों की गहरी पीड़ा दिखाता है। • “सुप्त अंकुर” मिट्टी में छिपी नई जीवन-आशा बताता है। • “उन्नत वीर” बादलों की ऊँची, साहसी मुद्रा दिखाता है। • “क्षत-विक्षत” शरीर चोटों से घायल होने का चित्र देता है। • “सुकुमार शरीर” शिशु की कोमलता और मासूमियत दिखाता है। इन विशेषणों से दृश्य अधिक स्पष्ट और भाव अधिक गहरे होते हैं।

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